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Delhi: विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री बनाने वाला गिरोह पकड़ा, पांच गिरफ्तार; कई तरह के नकली प्रमाण-पत्र बरामद

Sat, 21 Jun 2025 06:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

आरोपियों के कब्जे से कई विश्वविद्यालयों की 228 मार्कशीट, 27 डिग्री सर्टिफिकेट और 20 माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किए गए हैं। इसके अलावा छह लैपटॉप और 20 मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए।
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demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी और पुरानी तारीख वाली डिग्री, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाने वाले गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कई विश्वविद्यालयों की 228 मार्कशीट, 27 डिग्री सर्टिफिकेट और 20 माइग्रेशन सर्टिफिकेट बरामद किए गए हैं। इसके अलावा छह लैपटॉप और 20 मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए।

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अपराध शाखा के विशेष पुलिस आयुक्त देवेश कुमार महला ने बताया, शुरुआती जांच में कई कोचिंग सेंटर मालिकों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई है। गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस टीम ने नेताजी सुभाष प्लेस में परमहंस विद्यापीठ के मालिक विक्की हरजानी को गिरफ्तार कर लिया। 

उसकी कार व कार्यालय की तलाशी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, सिक्किम, मेघालय और तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों के 75 जाली शैक्षणिक दस्तावेज बरामद हुए। हरजानी से पूछताछ के बाद गिरोह में शामिल चार आरोपियों विवेक गुप्ता, सतबीर सिंह, नारायण और अवनीश कंसल को गिरफ्तार किया गया।
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20 से 25 कोचिंग सेंटर शामिल
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के फोरेंसिक विश्लेषण में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीटेक, बीएएमएस, बीएड, एमबीए और एमए जैसे कार्यक्रमों के लिए फर्जी डिग्री और मार्कशीट की 5,000-5,500 से अधिक सॉफ्ट कॉपी मिली हैं। ये दस्तावेज कई राज्यों के कई विश्वविद्यालयों से आए हैं। जांच से पता चला कि 20 से 25 कोचिंग सेंटर इस सुव्यवस्थित नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो छात्रों को जरूरतों के मुताबिक नकली दस्तावेज देते हैं।

दिल्ली-एनसीआर में कॉल सेंटर चलाते थे   
विशेष पुलिस आयुक्त ने बताया, आरोपी दिल्ली-एनसीआर में शैक्षिक कॉल सेंटर चलाते थे। उन्होंने व्हाट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक व एक्स के जरिये अपना प्रचार किया। वे छात्रों को मान्यता प्राप्त यूजीसी व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश का झांसा देते थे। इसके बाद छात्रों के शैक्षिणक दस्तावेज लेकर उनकी तरह हूबहू जाली दस्तावेज तैयार करते थे। 

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