फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम या दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर कोई खुद को पुलिसकर्मी बताकर आपसे संपर्क करे तो जरा सावधान हो जाएं। जी हां साइबर ठग इन दिनों पुलिसकर्मी बनकर लोगों से नजदीकियां बढ़ाकर उनके साथ फरेब कर रहे हैं। कभी अपने करीबी के मुसीबत में होने की बात या गिरफ्तारी का डर दिखाकर रकम ऐंठ ली जाती है।
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो राजधानी में हर दिन औसतन साइबर ठगी की लगभग 650 शिकायतें आती हैं। इनमें करीब आठ लोगों के साथ पुलिसकर्मी बनकर ठगी की जाती है। कई मामलों में तो साइबर ठगों ने अपने नंबर और डीपी ट्रू-कॉलर पर सेव भी की हुई है। कॉल आने पर लोग आसानी से इनके जाल में फंसकर अपनी रकम गंवा देते हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सजग रहकर ही इस तरह के मामलों से बचा जा सकता है। यदि कोई खुद को पुलिसकर्मी बताकर आपका विश्वास जीतने या डराने का प्रयास करे तो उसको क्रॉस चेक जरूर करना चाहिए। ठगी का शिकार वही लोग होते हैं जो इन लोगों पर आंख मूंदकर विश्वास कर लेते हैं या डर जाते हैं।
रिश्तेदार को गिरफ्तार कर लेने के नाम पर ठगी : अंबेडकर कालोनी ब्रिजवासन के रहने वाले दिपांशु मीना की दादी भोली देवी के पास एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर कॉल आई। फाेन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा आपके रिश्तेदार शिव प्रकाश को हमने पकड़ा है। वह आपराधिक मामले में शामिल है। उसे छोड़ने के बदले भोली देवी से रकम की डिमांड की गई। रुपये न देने पर शिव प्रकाश को जेल भेजने का डर दिखाया गया।
पीड़िता पर एक पेटीएम नंबर पर रकम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया। पीड़िता ने परेशान होकर दिए गए पेटीएम नंबर पर 55 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में दोबारा से रुपये मांगने पर पीड़िता को शक हुआ। बाद में मामले की शिकायत दक्षिण-पश्चिम साइबर थाने में की गई।
रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त बनकर की गई ठगी
बलजीत रंधावा (59) परिवार के साथ स्वरूप नगर में रहते हैं। पिछले दिनों उनके फेसबुक पर डीसीपी रोहिणी के नाम से बनी एक आईडी का सुझाव आया। नौ नवंबर को बलजीत ने उस पर फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट भेज दी। अगले ही दिन उसे स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद दोनों के बीच चैटिंग हुई। खुद को डीसीपी बताने वाले शख्स ने पीड़ित को बताया उनका दोस्त आशीष सीआरपीएफ में अफसर है। उनके दोस्त का ट्रांसफर हो गया है।
वह अपने घर का सामान सस्ते दाम पर बेचना चाहता है। पीड़ित से कहा गया कि आशीष आपको थोड़ी देर में कॉल करेगा। फोन आने पर आशीष ने डीसीपी रोहिणी का हवाला दिया। बाद में फर्नीचर बेचने की बात की। पीड़ित को व्हाट्सएप पर फर्नीचर की फोटो भी भेज दी गई। बलजीत ने 75 हजार रुपये में सौदा कर लिया। फर्नीचर का आधा पेमेंट एडवांस में देने की बात हुई। पीड़ित ने आरोपी के बैंक खाते में रकम भेज दी। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित से कोई संपर्क नहीं किया। न तो रुपये वापस किए गए और न ही फर्नीचर दिया गया। ठगी का पता चलने पर मामले की शिकायत रोहिणी जिला साइबर थाने में की गई।
रोज औसतन 650 ठगी की शिकायतें
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजधानी में औसतन हर दिन 650 साइबर ठगी की शिकायतें आती हैं। कोविड के बाद तो ठगी के मामलों में कई गुना बढ़ोतरी हुई। एनसीआरबी के आंकड़े देखे तो वर्ष 2020 में पूरे भारत में साइबर ठगी के 50035 मामले सामने आएं, वहीं 2021 में 52974 तो वर्ष 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.84 लाख हो गया।
बचाव के लिए क्या करें
- किसी अनजान व्यक्ति पर बिल्कुल भी भरोसा न करें, अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- यदि कोई आपको डराकर पैसे वसूलने का प्रयास करे तो बिल्कुल भी न डरें
- इस तरह की कॉल को क्रॉस चेक करें, बिना जांच-पड़ताल के किसी को पैसा न भेजे
- किसी अनजान मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड या बैंक खाते में रकम बिल्कुल भी न भेजें
- ठगी का शिकार होने पर 1930 पर कॉल कर शिकायत दें या cybercrime.gov.in शिकायत करें
- अपने नजदीकी साइबर थाने जाकर भी शिकायत की जा सकती है
ठगी के लिए इन तरीकों का किया जाता है इस्तेमाल
- ज्यादातर मामलों में दिल्ली पुलिस या मुंबई पुलिस का अधिकारी बनकर ठगी की जाती है
- कई बार अर्धसैनिक बलों का जवान या सेनाकर्मी बनकर भी वारदात को अंजाम दिया जाता है
- ज्यादातर मामलों में घर का सामान, गाड़ी, दोपहिया वाहन बेचने या पीड़ितों को गिरफ्तारी का डर दिखाकर रकम वसूली जाती है
- कई बार किसी परिजन के हादसे का शिकार होने की बात कर पुलिसकर्मी बनकर मदद के नाम पर रुपयों की डिमांड की जाती है
- रिश्तेदार के किसी आपराधिक मामले में फंसने और मामले को रफा-दफा करने के नाम पर मोटी रकम की डिमांड की जाती है
- कई बार कूरियर के जरिये विदेश में मादक पदार्थ और फजी पासपोर्ट भेजने का आरोप लगाकर वसूली जाती है मोटी रकम
- गूगल सर्च की मदद से किसी थाने के नंबर लेकर उस पर कॉल करने पर भी आरोपी पीड़िता को बना लेते हैं ठगी का शिकार