होटल में मौजूद एजेंट ने निरंजन के पास कैश देखा और वीजा का इंतजाम करने के लिए कहा। इस बीच अगले दिन खुद को विनीत बताने वाले शिवम ने निरंजन को व्हॉट्सएप कॉल की। शिवम ने बताया कि उसकी टिकट बुक है और वह एयरपोर्ट आ जाए। निरंजन एयरपोर्ट के लिए निकला। इस बीच खुद को एयरपोर्ट अथॉरिटी का ऑफिसर बताने वाले कुछ लोगों ने होटल में रेड डाली। आरोपियों ने कहा कि वह अवैध रूप से लोगों को कनाडा भेजते हैं। गिरफ्तारी का डर दिखाकर आरोपियों ने निरंजन के रिश्तेदारों व परिवार वालों से 37 लाख रुपये ले लिए। घटना के दौरान आरोपी होटल की डीवीआर भी अपने साथ ले गए। बाद में सभी फरार हो गए। घटना के बाद निरंजन और बाकी लोगों को ठगी का पता चला।
पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। सीसीटीवी फुटेज से एक आई-10 कार के वारदात में इस्तेमाल होने का पता चला। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी पंजाब के जीरकपुर में भी वारदात को अंजाम देने गए थे। वहां भी पुलिस को एक होटल की सीसीटीवी फुटेज मिली। फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर नोएडा सेक्टर-55 के एक होटल में छापा मारकर शिवम और ईश्वेंद्र सिंह को दबोच लिया। दोनों ने वारदात में अपना हाथ होने की बात कुबूल कर ली। आरोपियों ने बताया कि गैंग का सरगना सचिन शर्मा नामक शख्स है। उसके कहने पर ही यह वारदात में शामिल हुए थे।
ऐसे करते थे ठगी
पुलिस पूछताछ में आरोपी शिवम व ईश्वेंद्र सिंह ने बताया कि फेसबुक के जरिये सचिन शर्मा से मुलाकात हुई थी। उसने दोनों से कहा कि दोनों बातचीत करने में बढ़िया हैं, इसलिए आसानी से वह अपने शिकार को जाल में फंसा सकते हैं। सचिन के कहने पर दोनों ठगी के लिए तैयार हुए। 28 जून को वह सचिन के कहने पर जीरकपुर गए थे। आरोपियों ने फेसबुक पर कनाडा वीजा के नाम से फर्जी पेज बनाया हुआ था। वहां जैसे ही कोई उनसे संपर्क करता, तो उसे वीजा और नौकरी दिलवाने का आश्वासन दिया जाता था। इसके बाद पीड़ितों को दिल्ली बुलाकर फर्जी रेड डलवाकर उनसे रकम ऐंठ ली जाती थी।