दिल्ली के डॉक्टरों ने 26 हफ्ते के जुड़वा बच्चों की दो दुर्लभ सर्जरी कर न सिर्फ उनकी जान बचाई बल्कि उनकी मां को भी नई जिंदगी दी। यह कारनामा किया है दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने, जिन्होंने बेहद जटिल सर्जरी की।
डॉ. विवेक जैन ने बताया कि डिलीवरी के वक्त बच्चों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा, जिससे वो स्थिर हो सकें और फिर उन्हें फेफड़ों के मैच्योर होने के लिए दवाएं दी गईं और कृत्रिम आहार दिया गया। डॉ. जैन ने बताया कि दोनों बच्चों की आंत में जन्म के तीसरे दिन ही कुछ समस्या हो गई थी जो उनकी मां में भी थी।
यही वजह थी कि उनके तत्काल सर्जरी की आवश्यकता थी लेकिन उनका वजन सिर्फ 1000 ग्राम था इसलिए उनके जिंदा रहने के चांस बहुत कम थे। पहली सर्जरी की शुरुआत में पेट के बगल में एक थैले(पाउच) का निर्माण किया गया और आंत को ठीक होने के लिए छोड़ दिया गया। छह से आठ हफ्ते बाद एक और सर्जरी की गई ताकि आंत की छेद को बंद किया जा सके।
दोनों सर्जरियों के बीच में बच्चे जिंदगी के लिए लड़ रहे थे और उन्हें कई प्रकार का डिस्ट्रेस, सेप्सिस, सांस में तकलीफ और हाइपोटेंशन भी हो गया था। हालांकि इन सभी बाधाओं से लड़ते हुए बच्चे ठीक हुए और जन्म के 12 हफ्तों बाद उन्हें उनके माता-पिता को सौंप दिया गया।
डॉक्टरों ने इस पर कहा कि यह किसी दैवीय कृपा से कम नहीं है कि बच्चा जिसने दो-दो सर्जरी झेली और वह प्रीमैच्योर पैदा हुआ वह अब बिल्कुल ठीक है। बच्चों की मां सोनी की भी दो सर्जरी हुई, जिसके तहत इंटेस्टाइनल ब्लॉकेड को निकाला गया और उनकी डिलीवरी भी की गई, जो 14 हफ्ते प्रीमैच्योर थी।