मेरे पास बहुत शब्द तो नहीं हैं लेकिन हां इतना जरूर है कि मैंने कोरोना वायरस को अपनी हिम्मत और डॉक्टरों की मेहनत से हरा दिया। इसी की बदौलत मुझे नई जिंदगी मिली है। मैं 73 वर्षीय मनमोहन सिंह दिल्ली का ही पहला कोरोना संक्रमित बुजुर्ग हूं जो अब स्वस्थ्य होकर घर आ चुका है। मैं अब पूरी तरह से ठीक हूं। यह मेरी नई जिंदगी है, इससे ज्यादा मैं और कुछ नहीं कह सकता।
लोगों को एक बात समझने की जरूरत है कोरोना वायरस बुजुर्गों के लिए खतरा बन सकता है लेकिन वो भी स्वस्थ्य हैं। एक ऐसी बीमारी जिसका न इलाज है और न दवा। फिर भी इंसान ठीक हो रहा है तो उसमें सबसे बड़ी वजह है आपका हौसला। आपका अगर हौसला कमजोर होगा तो इस जंग को कैसे जीत पाएंगे। पूरी दुनिया महामारी युद्घ लड़ रही है। मैंने अपने जीवन में पहले कभी ऐसा अदृश्य दुश्मन से युद्ध नहीं देखा।
भगवान ने अब दिखाया है तो मुझे उसे हराने का मौका भी मिल गया। हमारे डॉक्टरों पर पूरा भरोसा रखें, सरकार पर विश्वास रखें। खुद सतर्कता बरतें। मुझे डॉक्टर ने जो भी सलाह दी हैं उनका मैं और मेरा पूरा परिवार ख्याल रख रहा है। हम घर में भी सोशल डिस्टैसिंग के नियमों का पालन कर रहे हैं।