दिल्ली का दमकल विभाग इंसानी जान ही नहीं पशुओं और परिंदों की जान पर बचाता है। गत वर्ष 2020 में दमकल विभाग के जवानों ने कुल 3691 परिंदों की जान बचाई। सभी परिंदे पेड़ व खंभों पर लटके मांझे में फंसे थे। घायल हुए पक्षियों को अस्पताल पहुंचाकर जवानों ने अपनी इंसानियत का परिचय दिया। दमकल विभाग के अधिकारियों की मानें तो परिंदों के लिए सबसे बुरा माह अगस्त का ही होता है। लोग आजादी के जश्न मनाने के लिए पतंग उड़ाकर इन परिंदों के लिए मुसीबतें खड़ी कर देते हैं। दमकल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक अगस्त में 882 पक्षिओं की जान दमकल विभाग के जवानों ने बचाई।
दमकल विभाग के निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि दमकल विभाग के कंट्रोल रूम को पिछले साल (जनवरी से दिसंबर) के बीच 25416 कॉल मिली थीं। इनमें आग, मकान गिरने, पशु-पक्षियों के फंसने व अन्य से संबंधित थी। इन कॉल्स का औसत देखा जाए जो रोजाना हर दिन 70 कॉल आई। इन कॉल में 3691 परिंदों, 2902 पशुओं के रेस्क्यू के लिए थीं। इनमें भी कुल कॉल में नवंबर में सबसे अधिक 2652, अक्तूबर में 2521 और अगस्त में 2466 कॉल थीं।
गर्ग ने बताया कि सबसे अधिक परिंदों के फंसने की कॉल अगस्त में आती हैं। पिछले साल जुलाई में 335, अगस्त में 882, सितंबर में 458, अक्तूबर में 264, नवंबर में 195 और दिसंबर में 310 परिंदों के फंसने की कॉल मिली। अतुल गर्ग ने बताया कि उनके लिए हर जान उनकी ही महत्वपूर्ण है जितनी इंसानी जान होती है। कई बार एक-एक पक्षी या पशु को बचाने में कई-कई घंटे लग जाते हैं। जवान अपनी जान पर खेलकर उनका रेस्क्यू ऑपरेशन करता है।