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दिल्ली में सर्दी से पहले आया सांसों पर संकट: धुआं छोड़ते वाहनों और सड़क पर उड़ती धूल से फिजा हो रही दमघोंटू

Thu, 16 Oct 2025 02:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन राजपूत, नई दिल्ली

सार

तेजी से बढ़ते वाहन और सड़कों से उड़ती धूल ने राजधानी की फिजा को प्रदूषित कर दिया है। यह जहरीली हवा अब हर सांस के साथ फेफड़ों की सेहत को खराब कर रही है।
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Delhi की हवा में घुला जहर - फोटो : self
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विस्तार
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राजधानी में सर्दी की अगवानी से पहले और पटाखे जलने से पूर्व ही हवा प्रदूषित हो गई है जो बीमारी बांटने की वजह बन गई है। तेजी से बढ़ते वाहन और सड़कों से उड़ती धूल ने राजधानी की फिजा को प्रदूषित कर दिया है। यह जहरीली हवा अब हर सांस के साथ फेफड़ों की सेहत को खराब कर रही है।

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दिल्ली में दोपहर तीन बजे के करीब हवा 36.802 फीसदी प्रदूषित थी, जिसमें 19.882% हिस्सेदारी वाहनों से निकलने वाले धुएं की थी। यह आंकड़ा वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली की रिपोर्ट पर आधारित है। पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रदूषण के अन्य कारकों की रोकथाम पर भी फोकस करना चाहिए। अन्यथा नवंबर-दिसंबर में हालात और भी खतरनाक हो सकते हैं और सीएक्यूएम ग्रेप के अगले चरण लागू कर सकती है।

     कारण                         प्रदूषण का स्तर

  • वाहन                         19.882
  • ऊर्जा                         1.973
  • परिधीय उद्योग             3.952
  • निर्माण कार्य                2.614
  • कूड़ा जलाना               1.795
  • पराली जलाना             0.454,
  • सडक से उड़ती धूल     1.293
  • आवासीय इलाके से      4.839

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कुल                         36.802 फीसदी
* वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली की रिपोर्ट के तहत बुधवार को दोपहर बाद तीन बजे दिल्ली के आंकड़े

ग्रेप-2 में रहती हैं ये पाबंदियां

  • डीजल जनरेटर चलने पर लगेगी रोक।
  • प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग फीस बढ़ाई जाएगी
  • सीएनजी-इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो की सर्विस को बढ़ाया जाएगा।
  • आरडबल्यूए सिक्योरिटी गार्ड को हीटर देंगी ताकि वे गर्माहट के लिए कूड़ा, लकड़ी या कोयला न जलाएं।
  • नैचुरल गैस, बायो गैस, एलपीजी से चलने वाले जेनरेटर चल सकेंगे।
  • 800 किलोवोल्ट-एम्पीयर से अधिक क्षमता वाले जेनरेटर तभी चलेंगे जब वह रेट्रोफिटिंग करवाएंगे।



 

ग्रेप तीन में रहती हैं ये पाबंदियां

  • एनसीआर में धूल पैदा करने वाली व वायु प्रदूषण फैलाने वाली सीएंडडी गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध।
  • बोरिंग और ड्रिलिंग कार्यों सहित खुदाई और भराई के लिए मिट्टी का काम।
  • पाइलिंग कार्य, सभी विध्वंस कार्य।
  • ओपन ट्रेंच सिस्टम द्वारा सीवर लाइन, पानी की लाइन, ड्रेनेज और इलेक्ट्रिक केबलिंग आदि बिछाना।
  • ईंट/चिनाई कार्य पर प्रतिबंध।
  • प्रमुख वेल्डिंग और गैस-कटिंग कार्य, हालांकि, एमईपी (मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग) कार्यों के लिए छोटी वेल्डिंग गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी।
  • सड़क निर्माण गतिविधियां और प्रमुख मरम्मत।
  • परियोजना स्थलों के भीतर व बाहर कहीं भी सीमेंट, फ्लाई-ऐश, ईंट, रेत, पत्थर आदि जैसी धूल पैदा करने वाली सामग्रियों का स्थानांतरण, लोडिंग/अनलोडिंग।
  • कच्ची सड़कों पर निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही।
  • विध्वंस अपशिष्ट का कोई भी परिवहन।

ग्रेप-4 में रहती हैं ये पाबंदियां

  • दिल्ली के बाहर से आने वाले सभी ट्रकों को प्रवेश पर पाबंदी रहेगी। जरूरी सामान लाने वाले व सीएनजी और इलेक्ट्रिक ट्रकों को छूट।
  • दिल्ली में पंजीकृत मध्यम व भारी डीजल संचालित माल वाहनों पर प्रतिबंध। जरूरी सामान वाले वाहनों को छूट मिलेगी।
  • एनसीटी दिल्ली व एनसीआर में डीजल चलित चार पहिया वाहनों पर रोक रहेगी। आपातकालीन वाहनों को छूट दी गई है। इस श्रेणी में केवल बीएस-6 वाहन चल सकते हैं।
  • एनसीआर में उद्योगों पर पाबंदी। जहां पीएनजी ईंधन की सुविधा नहीं है और सरकार द्वारा अधिकृत सूची से बाहर के ईंधन का उपयोग किया जा रहा है तो रोक लगेगी। हालांकि, दूध व डेयरी उत्पादों और मेडिकल उपकरणों से जुड़े उद्योगों को छूट दी जाएगी।
  • निर्माण व विध्वंस गतिविधियों पर रोक। इसके अलावा फ्लाईओवर, राजमार्ग, पुल व पाइपलाइन समेत अन्य गतिविधियों पर रोक। केंद्र सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को घरों से काम करने की छूट दे सकती है।
  • एनसीआर राज्य सरकारें सार्वजनिक, निगम और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी क्षमता के साथ घरों से काम करने की छूट दे सकती है।
  • राज्य सरकारें स्कूल व कॉलेज को बंद करने के साथ गैर आपातकालीन वाणिज्यिक गतिविधियों को बंद कर सकती है।
  • राज्य सरकार लागू कर सकती है ऑड-ईवन योजना
  • डीजल जनरेटर सेट पर प्रतिबंध

कैसे लागू होते हैं ग्रेप के प्रतिबंध?
मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण खराब एयर क्वालिटी की स्थिति आमतौर पर सर्दियों के मौसम के दौरान नवंबर से जनवरी तक रहती है। ऐसे में दिल्ली में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) के तहत अक्सर प्रतिबंध लागू किए जाते हैं। इसके तहत वायु गुणवत्ता को चार चरणों में बांटा गया है। पहला चरण, एक्यूआई 201 और 300 (खराब श्रेणी) के बीच होने पर लागू किया जाता है जबकि दूसरा चरण एक्यूआई 301 और 400 (बहुत खराब) के बीच, तीसरा चरण एक्यू 401 और 450 (गंभीर श्रेणी) के बीच, और चौथा चरण एक्यूआई 450 से ऊपर (अति गंभीर) होने पर लागू किया जाता है।

वायु गुणवत्ता इंडेक्स के मानक
एक्यूआई 0-50 के बीच ‘अच्छा’ , 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101-200 के बीच ‘मध्यम’, 201-300 के बीच ‘खराब’, 301-400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401-500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

  • मौसमी बदलाव: ठंडे मौसम की शुरुआत, सूखी हवा और कम हवा की गति से प्रदूषक कण हवा में फंस जाते हैं। इससे ग्राउंड-लेवल ओजोन बढ़ता है, जो नाइट्रोजन और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (वीओक्स) से बनता है। मानसून के लंबे होने के बावजूद, यह बदलाव प्रदूषण को तेजी से बढ़ा रहा है।
  • वाहन उत्सर्जन और ट्रैफिक: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वाहनों से निकलने वाले धुएं (पीएम10 और अन्य कण) मुख्य योगदानकर्ता हैं। शहरीकरण और औद्योगिक विकास से फॉसिल ईंधन का उपयोग बढ़ा है, जो एरोसोल और स्मॉग पैदा करता है।
  • औद्योगिक गतिविधियां और निर्माण कार्य: फैक्टरियां, थर्मल पावर प्लांट्स और निर्माण स्थलों से निकलने वाले उत्सर्जन प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं।
  • कृषि अवशेष जलाना (स्टबल बर्निंग): उत्तर भारत के किसानों द्वारा धान के अवशेष जलाना अभी पूर्ण रूप से शुरू नहीं हुआ है, लेकिन अक्तूबर के अंत तक यह प्रमुख कारक बनेगा, जो स्मॉग को और घना करेगा।
  • दिवाली से जुड़े कारक: पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद, कम प्रदूषण वाले पटाखों की अनुमति से संभावित वृद्धि की आशंका है।

एक्यूआई बीते एक सप्ताह का

  • 15 अक्तूबर-233
  • 14 अक्तूबर-211
  • 13 अक्तूबर-189
  • 12 अक्तूबर-167
  • 11 अक्तूबर-199
  • 10 अक्तूबर-170
  • 9 अक्तूबर-100

(स्त्रोत: सीपीसीबी के आकंड़ों के अनुसार)

दिल्ली की हवा को प्रदूषित करने का मुख्य कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है, जिसकी भूमिका करीब 40 फीसदी है। त्योहारी सीजन में लोग अधिक यात्रा करते हैं। ऐसे में सड़कों पर कंजक्शन ज्यादा होता है। सड़क से उड़ने वाली धूल, निर्माण कार्य और कूड़ा जलाने जैसी घटनाएं हवा को प्रदूषित कर रही है। क्योंकि सर्दियों के दिनों में प्रदूषण को ऊपर जाने जाने का रास्ता नहीं मिलता। इसके चलते प्रदूषण तत्व पीएम 2.5 और पीएम 10 कण हवा में घुल जाते हैं।
--शांभवी शुक्ला, प्रोग्राम मैनेजर, सीएसई

ग्रेप-1 की जमकर उड़ी धज्जियां
हवा में मौजूद प्रदूषण के बढ़े स्तर के बीच आंखें जलन से परेशान हैं तो फेफड़ों की सेहत हर सांस के साथ प्रभावित हो रही है। यह किसी एक व्यक्ति के अंगों की बात नहीं है बल्कि बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में रहने वाला शख्स इस परेशानी से जूझ रहा है। दिल्ली में मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद केंद्रीय गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप का पहला चरण लागू कर प्रदूषण रोकने का दावा किया, लेकिन बुधवार को सारी पाबंदियां हवा-हवाई हो गईं। जमीनी स्तर पर नियमों की जमकर धज्जियां उड़ती दिखीं। सरेराह जलता कूूड़ा और सड़कों पर उड़ता धूल का गुबार रोज की तरह नजर आया। निर्माण कार्य भी बिना सावधानी बरतें किए जा रहे थे। 

कूड़े में लगने वाली आग और सांसत में सांस
राजधानी दिल्ली में तमाम प्रयासों के बाद भी कूड़े में आग लगने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसकी वजह से दिल्ली की हवा की सेहत को और खराब हो रही है। दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़ों पर गौर करें तो गाजीपुर, भलस्वा और ओखला इलाके में कूड़े के पहाड़ों पर आग लगने समेत वर्ष 2025 में 1 जनवरी से लेकर 30 सितंबर तक 2653 जगह आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। इस कारण दूषित होती हवा से दिल्लीवासियों का सांस लेना दुश्वार हो जाता है।

दिल्ली फायर सर्विस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कूड़े में लगने वाली आग को गंभीरता से लेने की हिदायत दी है। कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां आग पर काबू पाने निकल रही हैं। प्रशासन लोगों से कूड़ा नहीं जलाने की अपील कर रहा है। दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़े पर गौर करें तो हर दिन औसतन कूड़ा जलने की करीब 10 कॉल आई हैं। आने वाले दिनों में इनकी संख्या बढ़ने वाली है। अकेले अप्रैल में ही कूड़े में आग लगने की 1030 कॉल आई हैं। प्रशासन ने हिदायत दी है कि कूड़े में आग लगने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा।

कूड़े में लगे आग तो दें दमकल विभाग को सूचना...
कूड़ा जलाने के दौरान निकलने वाले जहरीली गैसों में नाइट्रोजन आक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और पालीसाइक्लिक कार्बनिक पदार्थ (पीओएम) शामिल हैं। दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं भी कूड़ा जलता हुआ दिखे तो फौरन दमकल विभाग को सूचित करें।

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इस साल कूड़े में आग के कुछ आंकड़े.....
महीना-----------------कॉल
जनवरी-----------------147
फरवरी-----------------272
मार्च-------------------249
अप्रैल-----------------1030
मई-------------------301
जून-------------------259
जुलाई------------------90
अगस्त------------------62
सितंबर------------------243

(नोट: आंकड़े एक जनवरी 2025 से 30 सितंबर 2025 के हैं)

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