सत्येंद्र जैन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अगर कोयले का इंतजाम नहीं किया, तो दिल्ली में बिजली संकट गहरा सकता है। ब्लैक आउट होने की भी संभावना है। दिल्ली में प्रतिदिन तकरीबन 6500 मेगावाट बिजली की खपत होती है। इसमें से आधी बिजली ताप आधारित उक्त बिजली संयंत्रों से मिलती है।
सत्येंद्र जैन ने बताया कि बिजली की नई दरें लागू होने के बाद फिक्स्ड चार्ज बढ़ गया है। उद्यमियों ने शिकायत की थी कि लोड बढ़ने पर अनाप-शनाप बिल आ रहे थे। कई मामलों में बकाया तीन से चार लाख रुपये तक आ रहा था। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने बिजली कंपनियों से कहा है कि बढ़े लोड पर ही अतिरिक्त चार्ज लें।
डीईआरसी को भी इस बारे में जानकारी दे दी गई है। उम्मीद है कि पंद्रह दिन में आयोग आदेश जारी कर देगा। इसके बाद सिक्योरिटी डिपोजिट केवल बढे़ हुए लोड पर लिया जाएगा, न कि पूरे लोड पर। उन्होंने बताया कि इसके दायरे में सभी तरह के उपभोक्ता आएंगे। हालांकि, सबसे ज्यादा फायदा उद्यमियों को मिलेगा।