केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनती रही हैं। ऐसे में इस बार के चुनाव में भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिली कामयाबी को दोहराना किसी चुनौती कम नहीं हैं।
राजधानी में मतदाताओं में लोकसभा चुनाव और उसके कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार चुनने का तरीका अलग रहा है। बीते तीन लोकसभा चुनाव और दो विधानसभा चुनाव के परिणाम में मतदाताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दल को चुना है। केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार बनती रही हैं। ऐसे में इस बार के चुनाव में भाजपा को लोकसभा चुनाव में मिली कामयाबी को दोहराना किसी चुनौती कम नहीं हैं।
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इस बार के चुनाव में आप जहां तीसरी बार पूर्ण बहुमत प्राप्त करने की चुनौती है तो वहीं भाजपा सत्ता का वनवास दूर करने और लोकसभा चुनाव के दौरान के वाेटरों अपने पाले में बरकरार रखने की पूरी कोशिश में है। वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने का प्रयास कर रही है। राजनीतिक जानकारों को कहना है कि दिल्ली के मतदाता राष्ट्रीय और प्रदेश के मुद्दों को ध्यान में रखकर राजनीतिक दलों को वोट करते हैं। लिहाजा लोकसभा चुनाव में मतदाताओं के सामने राष्ट्रीय मुद्दे होते हैं वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रदेश के मुद्दों पर मतदान होता है। यहीं कारण है कि पिछले दो लोकसभा चुनाव और उसके कुछ माह बाद हुए विधानसभा चुनावों का परिणाम अलग-अलग रहा है।
स्विंग वोटरों की भूमिका अहम...
भाजपा के सामने स्विंग वोटरों को साधने की चुनौती भी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव भाजपा को महाराष्ट्र और हरियाणा में नुकसान उठाना पड़ा था। लेकिन पांच महीने बाद दोनों ही राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में बहुमत मिला। जिस तरह भाजपा ने हरियाणा और महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान की भरपाई विधानसभा चुनाव में की उसमें स्विंग वोटरों की बड़ी भूमिका रही है।
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दिल्ली में 2014 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 32.9 फीसदी, भाजपा को 46.4 फीसदी और कांग्रेस को 15.1 फीसदी वोट मिले थे। सातों सीटें भाजपा जीतने में कामयाब रही। ठीक इसके आठ महीने के बाद 2015 के विधानसभा चुनाव हुए तो पूरा सीन ही बदल गया। आम आदमी पार्टी को 54.5 फीसदी, भाजपा को 32.2 फीसदी और कांग्रेस को 9.7 फीसदी वोट मिले। आम आदमी पार्टी को 21.6 फीसदी वोटों का फायदा हुआ जबकि बीजेपी को 14.1 और कांग्रेस को 5.4 फीसदी का नुकसान हुआ।
2019 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 18.1 फीसदी वोट मिले। भाजपा को 56.8 फीसदी और कांग्रेस को 22.5 फीसदी वोट मिले थे, लेकिन एक साल के बाद विधानसभा चुनाव हुए सीन बदल गया। 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट प्रतिशत 53.6 और भाजपा का 38.5 फीसदी रहा। कांग्रेस ने 4.3 फीसदी वोट हासिल किए। इस तरह से आम आदमी पार्टी को 35 फीसदी का फायदा तो भाजपा को 18 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा। जानकारों का कहना है कि दिल्ली के चुनावी वोटिंग पैदर्न को देखें तो करीब 20 से 25 फीसदी मतदाता स्विंग वोटर हैं, जो लोकसभा में अलग और विधानसभा में अलग वोटिंग करते हैं। ये स्विंग वोटर ही दिल्ली के सियासी रुख को तय करते हैं।