दिल्ली विधानसभा चुनावों में हर बार जुझारू राजनीति और असाधारण चुनावी मुकाबलों के लिए प्रसिद्ध कई नेता इस बार चुनावी दंगल से गायब हैं, जिनमें रामवीर सिंह बिधूड़ी, मतीन अहमद और शोएब इकबाल शामिल हैं। इन नेताओं ने वर्ष 1993 से 2020 तक विभिन्न दलों और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों पर दबदबा बनाए रखा था। रामवीर सिंह बिधूड़ी के साथ सात चुनाव में दो-दो हाथ करने वाले रामसिंह नेताजी इस बार भी चुनाव लड़ रहे हैं।
वर्ष 1993 में जनता दल के टिकट पर रामवीर सिंह बिधूड़ी (बदरपुर), मतीन अहमद (सीलमपुर) और शोएब इकबाल (मटिया महल) ने जीत दर्ज की थी। उसी साल कांग्रेस के रामसिंह नेताजी बदरपुर में बिधूड़ी से हार गए। 1998 में रामसिंह नेताजी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बिधूड़ी को हराया, जबकि मतीन अहमद और शोएब इकबाल ने क्रमशः निर्दलीय और जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की, जबकि वर्ष 2003 में बिधूड़ी ने एनसीपी के टिकट पर कांग्रेस के रामसिंह नेताजी को हराया। मतीन अहमद और शोएब इकबाल ने क्रमशः कांग्रेस और जनता दल (एस) के टिकट पर जीत हासिल की। इस दौर में नेताओं ने दल बदलकर रणनीतियां मजबूत कीं।
वर्ष 2008 में शोएब इकबाल लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर मटिया महल से जीते। मतीन अहमद ने कांग्रेस के टिकट पर जीत बरकरार रखी, लेकिन बिधूड़ी कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर हार गए। वर्ष 2013 में बिधूड़ी ने भाजपा के टिकट पर बदरपुर से जीत दर्ज की और कांग्रेस के रामसिंह नेताजी को हराया। मतीन अहमद और शोएब इकबाल ने क्रमशः कांग्रेस और जनता दल (यू) के टिकट पर जीत दर्ज की।
2015 में आप की लहर में बदरपुर, सीलमपुर और मटिया महल के स्थापित नेता अपनी सीटें हार गए। बिधूड़ी और रामसिंह नेताजी बदरपुर में हार गए, जबकि मतीन अहमद और शोएब इकबाल को भी पराजय का सामना करना पड़ा। वर्ष 2020 में बिधूड़ी ने भाजपा के टिकट पर बदरपुर से जीत दर्ज की, जबकि शोएब इकबाल आप के टिकट पर मटिया महल से विजयी हुए। मतीन अहमद कांग्रेस के टिकट पर सीलमपुर से हार गए।
नई पीढ़ी की दस्तक
इस बार रामवीर सिंह बिधूड़ी सांसद बनने के कारण चुनाव नहीं लड़ रहे। शोएब इकबाल और मतीन अहमद की जगह उनके बेटे आप के टिकट पर मैदान में हैं। वहीं, रामसिंह नेताजी, जिन्होंने कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पहचान बनाई थी, इस बार आप के टिकट पर बदरपुर से किस्मत आजमा रहे हैं।