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Elections : दो चुनावों में दिल्ली के दिल में निर्दलीय नहीं बना पा रहे जगह, और दो बार सबकी हो गई जमानत जब्त

Sat, 25 Jan 2025 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा योगेश तिवारी, नई दिल्ली

सार

बड़े-बड़े नेता सभाएं कर रहे हैं। दलों के बीच सत्ता के लिए संग्राम चल रहा है। चुनाव में राजनीतिक दलों से हटकर निर्दलीय उम्मीदवार भी उतरे हुए हैं। बात अगर निर्दलीयों की दिल्ली के चुनाव में करें तो 1993 में अच्छी शुरुआत हुई थी, तीन विधायक निर्दलीय चुने गए थे।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने पूरा जोर लगाया हुआ है। बड़े-बड़े नेता सभाएं कर रहे हैं। दलों के बीच सत्ता के लिए संग्राम चल रहा है। चुनाव में राजनीतिक दलों से हटकर निर्दलीय उम्मीदवार भी उतरे हुए हैं। बात अगर निर्दलीयों की दिल्ली के चुनाव में करें तो 1993 में अच्छी शुरुआत हुई थी, तीन विधायक निर्दलीय चुने गए थे।

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आगे इनकी संख्या कम हुई, लेकिन 20 साल में हुए चार चुनाव में खाता खुलता रहा। आखिर में 2013 में एक निर्दलीय विधायक चुना गया था। फिर 2015, 2020 के चुनाव में खाता भी नहीं खुला। यही नहीं पिछले दोनों चुनावों में कोई भी निर्दलीय अपनी जमानत भी नहीं बचा पाया है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में निर्दलीयों का इतिहास यह रहा है कि अब तक 2474 प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं, इनमें से 8 विधायक बने हैं। 2305 की जमानत जब्त हुई है।
1993 में तीन निर्दलीय विधायक बने

1993 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार 3 विधायक बने थे। इस चुनाव में तुगलकाबाद से शीष पाल, नजफगढ़ से सूरज प्रसाद, भलस्वा जहांगीरपुर से जितेंद्र कुमार विधायक चुने गए थे। कुल 766 निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे थे। इनको 2,10,086 वोट मिले थे। यह मत प्रतिशत 5.92 रहा था। निर्दलीय प्रत्याशियों में 762 की जमानत जब्त हुई थी।
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1998 में दो निर्दलीय विधायक बने
1998 में हुए विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या भले घटी थी, लेकिन इनको मिलने वाले वोटों की संख्या बढ़ गई थी। 353 निर्दलीय मैदान में उतरे थे। इनको 3,55,773 वोट मिले थे। यह मत प्रतिशत 8.70 रहा था। 347 उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए थे। वहीं बदरपुर से राम सिंह नेताजी, सीलमपुर से चेतन अहमद निर्दलीय विधायक चुने गए थे।

2003 में एक निर्दलीय विधायक बना
2003 के चुनाव में पूरी दिल्ली में एक निर्दलीय विधायक चुना गया। नजफगढ़ से बतौर निर्दलीय रनवीर सिंह चुनाव मैदान में उतरे और जीते। इस चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या 284 थी, जिनमें से 278 की जमानत जब्त हुई थी। 2,19,225 वोट मिले थे। यह मत प्रतिशत 4.86 था।

2008 के चुनाव में फिर नजफगढ़ ने ही चुना निर्दलीय विधायक
2008 के विधानसभा चुनाव में 358 निर्दलीय उम्मीदवार दिल्ली के चुनावी मैदान में उतरे थे, लेकिन फिर से नजफगढ़ ने ही निर्दलीय विधायक चुना। इस बार भरत सिंह यहां से निर्दलीय विधायक बने थे। 355 उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे। निर्दलीयों को 2,42,000 वोट मिले थे। यह मत प्रतिशत 3.92 था।

2013 में एक निर्दलीय विधायक बना था
2013 के विधानसभा चुनाव में 222 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमें से 220 प्रत्याशी जमानत नहीं बचा पाए थे। कुल 2,30,425 वोट मिले थे। यह मत प्रतिशत 2.93 था। मुंडका से रामवीर शौकीन निर्दलीय विधायक चुने गए थे।

2015 और 2020 के चुनाव में फिर खाता नहीं खुला
2015 के विधानसभा चुनाव में 195 उम्मीदवार उतरे थे, जीत तो दूर कोई भी अपनी जमानत नहीं बचा पाया। इनको 47,627 वोट मिले थे। यह मत प्रतिशत 0.53 था। 2020 के चुनाव में 148 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। इन सभी की जमानत जब्त हुई थी। कुल 35,374 वोट मिले थे। यह मत प्रतिशत 0.38 था।

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