युवा डॉक्टरों की ओर से काउंसिल के चुनाव में दिल्ली एम्स के डॉ. राजीव रंजन, डीडीयू से डॉ. असगर अली, आईसीएमआर से डॉ. मनीष चंद्र प्रभाकर, आरएमएल से डॉ. राहुल चौधरी व डॉ. निर्मल्या महापात्रा, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से डॉ. साहिल सिंगला, जामिया हमदर्द से डॉ. संजीव कुमार चौधरी और सफदरजंग अस्पताल से डॉ. दीपांकर चौधरी मैदान में उतरे हैं।
कौन कर सकता है वोट
दिल्ली में प्रैक्टिस करने वाले एलोपैथी डॉक्टर डीएमसी से पंजीकृत होते हैं। ये सभी डॉक्टर डीएमसी चुनाव के लिए वोट करते हैं। चुनाव में 8 पदों के लिए सदस्य खड़े होते हैं। एक डॉक्टर सभी आठों को वोट देता है। दिल्ली में करीब 64 हजार से ज्यादा डीएमसी मतदाता हैं।
यहां भी ईमानदारी है सबसे बड़ा मुद्दा
डॉ. अंकित ओम के अनुसार डीएमसी के चुनाव में अब युवा डॉक्टरों के उतरने की कई वजह हैं। देश में लंबे समय से चंद डॉक्टर ही पूरे सिस्टम को हाईजैक करने में जुटे हैं। एक परिपाटी भी चली आ रही है। जबकि असल मुद्दों पर ये लोग काम नहीं करते और नेताओं के आगे-पीछे रहकर अपने सिद्घांतों से समझौता कर लेते हैं। इसीलिए अब युवाओं ने सिस्टम बदलने के लिए चुनाव लडऩे की तैयारी की है। उन्होंने दावा किया है कि इस बार जीत उन्हीं की होगी।