दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा और आप के बीच मतों का अंतर महज दो फीसदी ही रहा, मगर परिणाम में इतना बड़ा फासला बना कि आप सत्ता से दूर हो गई। आप ने 10 ऐसी बड़ी भूलें कीं, जिनके कारण वह सत्ता से चूक गई। उसे अरविंद केजरीवाल की ईमानदार नेता की छवि टूटने के अलावा कांग्रेस से गठबंधन न करने की रणनीतिक भूल खासा भारी पड़ी, जिसके चलते उसने 13 सीटें गंवाईं।
इस चुनाव में बीते 10 साल से दिल्ली की सत्ता पर आसीन आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा झटका लगा है। 2020 के चुनाव में जहां पार्टी के 62 विधायक थे अब उनकी संख्या घटकर 22 रह गई।
वहीं आठ सीटों पर विपक्ष की भूमिका निभा रही भाजपा को दिल्ली की जनता का खूब आशीर्वाद मिला। भाजपा को इस चुनाव में 70 सीटों में से 48 सीटों पर जीत मिली हैं। दिल्ली में सरकार बनाने के लिए 36 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में भाजपा को बहुमत से अधिक 12 सीटें मिली।
संगम विहार और त्रिलोकपुरी में सबसे कम अंतर से जीती भाजपा
संगम विहार और त्रिलोकपुरी विधानसभा में भाजपा के उम्मीदवारों को सबसे कम अंतर से जीत मिली है। संगम विहार से भाजपा उम्मीदवार चंदन कुमार चौधरी को 344 वोटों के अंतर से जीत मिली है। वहीं त्रिलोकपुरी विधानसभा से भाजपा उम्मीदवार रवि कांत 392 वोटों के अंतर से जीते हैं। वहीं जंगपुरा विधानसभा से पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भाजपा उम्मीदवार तरविंदर सिंह मारवाह से मात्र 675 वोटों से हारे हैं।