Delhi Election Result 2025: पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सबसे ज्यादा भाजपा के विधायक बने। 10 में से नौ सीटें जीतने में सफलता पाई। सांसद मनोज तिवारी और दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी के क्षेत्रों में 10 में से पांच-पांच सीटों पर जीत मिली।
27 साल बाद दिल्ली में सत्ता वापसी करने वाली भाजपा के सातों सांसद विधानसभा चुनाव की परीक्षा में पास हुए हैं। अंतर सिर्फ अंकों का है। पश्चिमी दिल्ली से सांसद कमलजीत सहरावत इस मामले में अव्वल रही हैं। पश्चिमी दिल्ली लोकसभा की 10 में से नौ सीटों को जीतने में कामयाबी मिली है।
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वहीं, निचले पायदान पर उत्तर पूर्वी दिल्ली भाजपा सांसद मनोज तिवारी और दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी रहे हैं। दोनों संसदीय क्षेत्रों की 10 में से पांच-पांच सीटें जिताने में दोनों को कामयाबी मिली।
पूर्वी दिल्ली और उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट की 10 सीटों में से आठ-आठ पर भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। नई दिल्ली पर सात और चांदनी चौक पर छह विधानसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।
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2020 के विधानसभा चुनाव में आप की लहर में भाजपा सिर्फ आठ सीटें ही जीत सकी थी। स्थिति यह हुई थी कि सात सांसदों में से तीन के क्षेत्र में एक भी भाजपा का उम्मीदवार नहीं जीत सका था।
दो लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी की लहर में दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर भाजपा जीत का परचम लहराती रही है, लेकिन कुछ माह बाद ही होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ रहा था। इस बार दिल्ली की जनता ने डबल इंजन सरकार पर मुहर लगाई है।
123 बूथों में से 115 पर हारे केजरीवाल
भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकलकर मुख्यमंत्री बने केजरीवाल को अपने ही विधानसभा क्षेत्र के 123 बूथों में से 115 पर हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराने वाले केजरीवाल को 64.34 फीसदी मत मिले थे। 2020 में यह अंतर कुछ ही कम हुआ और उन्हें 61.10 फीसदी मिले। इस बार के चुनाव में 43 फीसदी मत ही मिले। ऐसे में उनके मत फीसदी में 2015 की तुलना में लगभग 20 फीसदी की कमी आई।
कई पार्षदों को मिली जीत
चुनाव में 11 पार्षद व एक मनोनीत पार्षद और तीन पार्षदों के पति बाजी मारने में सफल रहे, वहीं छह पूर्व पार्षद भी विधायक बने। इनमें से कई ने दिल्ली के मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक व पूर्व विधायक को पटकनी दी। इन नवनिर्वाचित विधायकों में भी कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने दिल्ली के मंत्री, पूर्व मंत्री और विधायक को हराया, जिससे यह चुनाव और भी दिलचस्प हो गया।
भाजपा के आठ और आम आदमी पार्टी के तीन पार्षद विधायक बनने में सफल रहे। वहीं भाजपा की दोे महिला पार्षदों के पति व आप की एक महिला पार्षद के पति ने जीत हासिल की, जबकि भाजपा के एक मनोनीत पार्षद भी जीते। विधायक बनने वाले सभी छह पूर्व पार्षद भाजपा के उम्मीदवार हैं। भाजपा पार्षद शिखा राय ने ग्रेटर कैलाश में दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज को हराया।
इसके अलावा भाजपा पार्षद गजेंद्र दराल ने मुंडका, रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग, पूनम शर्मा ने वजीरपुर, उमंग बजाज नेे राजेंद्र नगर, चंदन चौधरी ने संगम विहार से आप विधायकों को चित किया। वहीं रविंद्र नेगी ने पटपड़गंज में प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल चौधरी का हरा दिया, जबकि पार्षद नीलम पहलवान ने नजफगढ़ और मनोनीत पार्षद राजकुमार भाटिया ने आदर्श नगर में जीत हासिल की।
बादली में भाजपा की महिला पार्षद के पति दीपक चौधरी ने आप के विधायक अजेश यादव के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव को हराया। मादीपुर में भाजपा की महिला पार्षद के पति कैलाश गंगवाल ने राखी बिड़लान को हरा दिया।
भाजपा का वोट फीसदी बढ़ा तो आप का घटा
विधानसभा चुनाव मे भाजपा के वोट शेयर में पिछले चुनाव की तुलना में करीब सात फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा 38.51 फीसदी वोट हासिल कर आठ सीटों पर सिमट गई थी। इस बार इसमें 7.05 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं, आप के वोट शेयर में बीते विधानसभा चुनावों की तुलना में 10% की गिरावट दर्ज की गई है।
वर्ष 2020 के चुनाव में आप को 53.57 फीसदी वोट मिले थे, इस बार पार्टी 43.57 फीसदी वोट हासिल करने में ही कामयाब रही। इससे सीटों की संख्या में 40 की कमी आई है। 62 सीटों से घटकर आप सिर्फ 22 सीटें जीती। दूसरी तरफ लगातार तीसरे चुनाव में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुला है।
फिर भी कांग्रेस के लिए थोड़ी राहत की खबर उसके वोट शेयर में हुए इजाफे से है। 2020 के चुनाव में कांग्रेस को 4.26 फीसदी वोट मिले थे। इस बार कांग्रेस को 6.34 फीसदी वोट मिले हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार के चुनाव में फ्लोटिंग वोटरों की बड़ी भूमिका रही है।