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केंद्रीय बजट में नहीं होगी दिल्ली से जुड़ी घोषणा, राज्य में किए कामों का भी नहीं होगा उल्लेख

Fri, 10 Jan 2020 05:17 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

-चुनाव आयोग ने किया एलान, नतीजे 11 फरवरी को आएंगे
-22 फरवरी को खत्म होगा 70 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल
-केंद्र सरकार बजट में दिल्ली से जुड़ी योजनाओं की नहीं कर पाएगी घोषणा
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सुनील अरोड़ा, मुख्य चुनाव आयुक्त - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद केंद्र सरकार अपने बजट में दिल्ली से जुड़ी योजनाओं की घोषणा नहीं करेगी और न ही राजधानी से जुड़ी अपनी उपलब्धियों का उल्लेख करेगी। केंद्र सरकार एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेगी जबकि राजधानी में आठ फरवरी को चुनाव होना है।

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चुनाव आचार संहिता का क्या केंद्रीय बजट पर असर होगा? इसके जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि ऐसी स्थिति से निपटने के लिये आयोग ने 2017 में अधिसूचना जारी की थी। यह अधिसूचना उस समय जारी की गई थी जब यूपी, उत्तरखंड, गोवा, पंजाब व मणिपुर में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय बजट पेश होना था।

दिल्ली के तख्त के लिए 8 फरवरी को मतदान, 11 नतीजे

चुनाव का कार्यक्रम
नोटिफिकेशन: 14 जनवरी
नामांकन की आखिरी तारीख: 21 जनवरी
नामांकन पत्रों की जांच: 22 जनवरी
नाम वापसी की तारीख: 24 जनवरी
मतदान: 8 फरवरी
नतीजे: 11 फरवरी

चुनाव आयोग ने सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा सीटों के लिए चुनाव का एलान कर दिया है। इसी के साथ राजधानी में आचार संहिता लागू हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दिल्ली में एक ही चरण में चुनाव होगा।

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8 फरवरी को सभी 70 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। वहीं, 11 फरवरी को चुनाव के नतीजे आएंगे। दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी, 2020 को खत्म हो रहा है। इससे पहले ही नई विधानसभा का गठन हो जाएगा।

वहीं, दिल्ली चुनाव के मद्देनजर भी केंद्र सरकार आम बजट में न तो दिल्ली से संबंधित किसी योजना की घोषणा कर सकेगी, न ही दिल्ली में हुए कार्यों को बजट में रेखांकित कर पाएगी। अरोड़ा ने कहा, 2017 में आयोग ने फैसला किया था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए आम बजट में राज्य आधारित योजना की घोषणा नहीं की जा सकेगी।

ऐसी कोई घोषणा नहीं की जा सकेगी जो उन मतदाताओं को प्रभावित कर सकती हो, जहां चुनाव होने जा रहे हैं। यह फैसला 5 राज्यों उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब, मणिपुर और उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान लिया गया था। उस वक्त चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के दौरान आम बजट पेश किया गया था।

अरोड़ा ने बताया कि चुनाव को लेकर राज्य चुनाव आयोग और पुलिस के साथ बैठक की गई थी। वोटरों को पोलिंग बूथ पर आने के लिए पिक अप-ड्रॉप मिलेगा। इसकी जानकारी वेबसाइट पर डाल दी जाएगी और एक नंबर भी जारी किया जाएगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति पर निगरानी रखने के लिए मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर बनाए गए हैं। इस बार सभी विधानसभाओं में मॉडल मतदान केंद्र होंगे। लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार 3 लाख 75 हजार मतदाता अधिक हैं।

ये सुविधाएं....

प्रत्याशियों को ऑनलाइन नामांकन की सुविधा
उम्मीदवारों को ऑनलाइन नामाकंन दाखिल करने की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए कार्यशाला आयोजित कर सभी राजनीतिक दलों को प्रशिक्षित किया जाएगा। हालांकि ऑनलाइन पर्चा भरने के बाद उसका प्रिंट  आउट लेकर चुनाव अधिकारी के कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा।

80 साल से ऊपर के बुजुर्ग कर सकेंगे पोस्टल बैलेट से मतदान
80 साल और इससे ऊपर के बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं को मतदान केंद्रों पर जाने की जरूरत नहीं होगी। इन मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग पोस्टल बैलेट से मतदान कराएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि इस चुनाव में अनुपस्थित मतदाताओं के लिए यह प्रणाली शुरू की गई है। इसके तहत वे मतदाता, जो शारीरिक दिक्कतों या अन्य अपरिहार्य कारणों के चलते मतदान केंद्रों पर नहीं पहुंच सकते हैं वे भी अपना वोट दे सकेंगे।

घर बैठे जानेंगे...मतदान केंद्र पर कितनी लंबी लाइन
खास बात यह है कि दिल्ली के 1.46 करोड़ मतदाता चुनाव में घर बैठे यह जान सकेंगे कि उनके नजदीकी मतदान केंद्र पर कितनी लंबी लाइन है और अब तक कितने लोगों ने मतदान किया है।
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मतदान केंद्र में ले जा सकेंगे मोबाइल 

इस बार मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल ले जा सकेंगे। यह सुविधा इसलिए भी शुरू की गई, क्योंकि चुनाव में पहली बार क्यूआर कोड वाले वोटर स्लिप का प्रयोग हो रहा है। ऐसे कर सकेंगे इस्तेमाल: चुनाव आयोग मतदान से पहले मतदाता पर्ची भेजेगा। उसमें एक क्यूआरकोड होगा। इसे चुनावकर्मी स्कैन करके आपको मतदान के लिए प्रवेश देंगे।

अगर आप वह पर्ची लेकर नहीं पहुंचे हैं तो अपने मोबाइल पर वोटर हेल्पलाइन ऐप से डिजिटल क्यूआर कोड वाली मतदाता पर्ची जेनरेट करना होगा। मतदान केंद्र पर बूथ लेवल ऑफिसर आपकी पर्ची स्कैन कर एक नंबर देंगे। इसके बाद मतदान करने जा सकेंगे। हालांकि, इससे पहले मोबाइल जमा कराना होगा।

मोबाइल लॉकर:  चुनाव आयोग मतदान केंद्र के अंदर ही मोबाइल लॉकर की सुविधा उपलब्ध कराएगा। वोट डालने से पहले मोबाइल मतदान केंद्र के अंदर बने लॉकर में जमा करना होगा। मतदान के बाद मोबाइल ले सकेंगे।

ये भी सुविधाएं:
-मांग करने पर दिव्यांग व बुजुर्ग मतदाताओं को घर से मतदान केंद्र तक लाने के लिए वाहन की सुविधा दी जाएगी।
-वोट डालने से पहले लॉकर में मोबाइल जमा कराने की सुविधा दी जाएगी।
-वेंटिग एरिया में बैठने के लिए सोफे लगाए जाएंगे।
-हर बूथ पर पीने के लिए वाटर डिस्पेंसर की सुविधा।
-चुनावकर्मियों व मतदाताओं के बच्चों के लिए क्रेच या प्ले एरिया होगा।

कुल सीटें: 70
58 सामान्य, 12 अनुसूचित जाति की सीटें
कुल पोलिंग बूथ: 13,750
वोटिंग स्थल: 2,689
चुनाव कर्मी: 90 हजार

कुल कितने और कैसे वोटर
कुल वोटर:1,46,92136
पुरुष वोटर:  8,05,5686
महिला वोटर: 66,35635
थर्ड जेंडर: 815
एनआरआई वोटर: 489
सर्विस वोटर: 11,556

70 सदस्यीय विधानसभा चुनाव 2015
आप: 67
वोट शेयर: 54.34 फीसदी
भाजपा: 03
वोट शेयर: 32.19 फीसदी
कांग्रेस: 00
वोट शेयर: 9.65 फीसदी

लोकसभा चुनाव 2019
सात सीटें

भाजपा: 7
वोट शेयर: 56.86 फीसदी
कांग्रेस: 00
वोट शेयर: 22.63 फीसदी
आप: 00
वोट शेयर: 18.2 फीसदी

काम किया है तो हमें वोट देना
 ये चुनाव दिल्ली सरकार के काम पर होगा। वोट स्कूलों, अस्पतालों के नाम पर सकारात्मक तौर पर पडे़गा, लोग खुशी से वोट देंगे। भारत के इतिहास में पहली बार लोग काम की तुलना करेंगे। अगर काम किया है, तो वोट देना, अगर नहीं किया है तो वोट मत देना। 5 साल का कामकाज लेकर सबके घर जाएंगे। स्कूल अच्छे किए जिसमें आप, कांग्रेस, भाजपा सबके बच्चे पढ़ते हैं।-अरविंद केजरीवाल, सीएम दिल्ली

आप ने पांच साल तक गुमराह किया
60 महीनों में आप सरकार ने सिर्फ वादे किए और अब 3 माह में जनता के विकास के पैसे को अपने विज्ञापनों पर खर्च किया। दिल्ली के लोग आज भी मुफ्त वाईफाई, 15 लाख सीसीटीवी कैमरे, नए कॉलेज और अस्पतालों की राह देख रहें हैं। जनता पांच साल तक गुमराह करने वालों को हराकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली की आकांक्षाओं को पूर्ण करने वाली सरकार चुनेगी।- अमित शाह, गृह मंत्री
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