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Delhi : केजरीवाल की डाइट मामले में ईडी पर मीडिया ट्रायल का आरोप, प्रवर्तन निदेशालय ने बताया दुर्भावनापूर्ण

Sat, 20 Apr 2024 06:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

केजरीवाल के वकीलों ने आम खाने की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित होने के पीछे ईडी का हाथ बताते हुए मीडिया ट्रायल का आरोप लगाया।
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जेल में आम व मिठाई खाने के मुद्दे पर शुक्रवार को अदालत में ईडी और केजरीवाल के वकीलों में जमकर बहस हुई। केजरीवाल के वकीलों ने आम खाने की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित होने के पीछे ईडी का हाथ बताते हुए मीडिया ट्रायल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईडी खबरों को प्रकाशित करवाने में सक्षम है, लेकिन ईडी तय नहीं कर सकती कि उनके मुवक्किल को क्या खाना है और क्या नहीं। ये मामला जेल प्रशासन और केजरीवाल के बीच का है।

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शुक्रवार को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा के समक्ष ईडी की आपत्तियों को सांविधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए केजरीवाल के वकील एएम सिंघवी ने कहा कि ईडी ने आम को चीनी की गोलियों जैसा बना दिया है और केजरीवाल को जेल में केवल एक बार नवरात्र प्रसाद के रूप में आलू पूड़ी भेजी गई थी। कैदी होने का मतलब यह नहीं है कि केजरीवाल को स्वास्थ्य का अधिकार नहीं है।

क्या वे एक गैंगस्टर हैं। उन्हें अपने डॉक्टर के साथ रोजाना 15 मिनट की वीडियो कांफ्रेंसिंग की अनुमति नहीं मिल सकती। हमारे यहां 75 साल से लोकतंत्र है, लेकिन मैंने इस तरह की तुच्छता कभी नहीं सुनी, देखी भी नहीं। वहीं, वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने भी कहा कि डाइट मामले में ईडी की कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि मामला मुख्यमंत्री और जेल अधिकारियों के बीच का है। ईडी को यहां क्यों होना चाहिए। यहां आने से पहले वे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। मैं पहली बार एक विशेष वकील को जेल अधिकारियों की ओर से पेश होते देख रहा हूं। आज एक अग्रेंजी समाचार पत्र में आधा फ्रंट पेज इस मुद्दे पर भरा हुआ है।
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केजरीवाल ने आवेदन में दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए : ईडी
ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि केजरीवाल ने अपने आवेदन में दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए हैं, जो केंद्रीय जांच एजेंसी को भी एक पक्ष बनाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि मैं पक्ष रखूं। तिहाड़ जेल अधिकारियों की ओर से पेश वकील ने अदालत को सूचित किया कि केजरीवाल पहले इंसुलिन ले रहे थे, लेकिन कुछ समय पहले उन्होंने इसे लेना बंद कर दिया। कुल मिलाकर, रक्त शर्करा का स्तर बनाए रखा गया है। केजरीवाल को घर का बना खाना मिल रहा है। वे घर से भेजे गए भोजन में निर्धारित आहार का पालन नहीं कर रहे हैं। जिस भोजन से उन्हें बचना है और आम उनमें से एक है। उन्हें इस डाइट प्लान के मुताबिक खाना चाहिए। 

एम्स की भी रिपोर्ट है कि शुगर में आम, केला व चीकू से बचना चाहिए। ऐसा नहीं है कि जेल में केजरीवाल की निगरानी नहीं की जा रही है या उन्हें कोई कठिनाई हो रही है। उन्हें चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। इस पर केजरीवाल के अधिवक्ता गुप्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जेल अधिकारियों की ओर से ईडी को एक ईमेल भेजा गया था जिसमें अदालत के आदेश के बिना केजरीवाल को दिए गए भोजन के बारे में जानकारी दी गई थी। जेल अधिकारी अदालत के आदेश के बिना केजरीवाल के आहार के बारे में ईडी को जानकारी नहीं दे सकते। न्यायिक हिरासत के बाद केजरीवाल के शुगर स्तर में चिंताजनक उतार-चढ़ाव हो रहा है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए उच्च जोखिम पैदा कर रहा है। जेल अधिकारियों ने ईडी के साथ मिलकर यह आरोप लगाकर मीडिया ट्रायल करने की कोशिश की कि जेल में उनके आहार के कारण शुगर लेवल बढ़ रहा है।

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