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10 हजार रुपये के जुर्माने से वाहन चालकों में खौफ, प्रदूषण जांच केंद्रों पर दिखी वाहनों की कतार

Mon, 17 Aug 2020 03:35 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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प्रदूषण चेकिंग के लिए लगी लाइन - फोटो : अमर उजाला
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प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती का असर दिल्ली के पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केंद्रों पर साफ दिखने लगा है। वाहनों से अगर धुआं निकल रहा है या नियंत्रित प्रदूषण का प्रमाण पत्र(पीयूसी) नहीं है तो 10 हजार रुपये का जुर्माना।

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ऐसे वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए शुरू हुई कार्रवाई का असर दिल्लीवासियों पर दिखने लगा है। लोग अपने जरूरी काम छोड़कर कतार में नजर आए ताकि पीयूसी जल्द से जल्द हासिल कर सकें। महामारी काल में अचानक सख्ती बढ़ाए जाने से फिक्रमंद वाहन चालक फिक्रमंद दिखे, सभी को जल्दी थी तो सर्टिफिकेट हासिल करने की।

हालांकि लोगों का कहना है कि जुर्माना की राशि काफी अधिक है और जांच केंद्रों पर भी माकूल सुविधाएं न होने की वजह से कई बार इंतजार करना पड़ता है। रविवार को भी सर्वर में आई खराबी से लोगों को इंतजार करना पड़ा।
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हैरानी की बात यह है कि कई ऐसे भी वाहन मालिक हैं जिन्हें अब तक जुर्माने की राशि 10 हजार रुपये किए जाने का भी पता नहीं है। अमर उजाला के संवाददाता सर्वेश कुमार और फोटोजनर्लिस्ट हिमांशु सोनी ने प्रदूषण केंद्रों का रविवार को जायजा लिया, पेश है एक रिपोर्ट:

समय: 12.45 बजे, 
प्रदूषण जांच केंद्र, गाजीपुर-

बाइक की प्रदूषण जांच करवाने पहुंचे दुर्गेश ने बताया कि दो दिन पहले पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की मियाद खत्म हो गई। लेकिन 15 अगस्त की छुट्टी की वजह से रविवार को जांच केंद्र पर पहुंचे। हालांकि सर्टिफिकेट न होने पर जुर्माना कितना है, इसका पता नहीं था। जैसे ही 10 हजार रुपये का जुर्माना होने की जानकारी मिली तो उन्होंने प्रदूषण जांच कराने का निर्णय किया। हालांकि इस राशि को काफी अधिक बताते हुए कहा कि कम होनी चाहिए।

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1.30 बजे, प्रदूषण जांच केंद्र,
 विनोद नगर-

ऑटो चालक वीरेंद्र ने कहा कि महामारी काल में जुर्माने का बोझ बढ़ने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। सर्टिफिकेट की वैधता खत्म होने से पहले जांच करवाने में एक दिन की भी चूक हो जाती है तो एक ऑटो चालक को पूरे महीने की कमाई से जुर्माना चुकाना होगा। 

बाइक चालक जवाहर ने बताया कि पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए नियंत्रित प्रदूषण का सर्टिफिकेट पहले भी जरूरी था। जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी से से लोगों में दहशत हैं। कोरोना काल में पहले ही आर्थिक मुश्किलों से लोग जूझ रहे हैं, ऐसे में भारी जुर्माना किए जाने से वाहन चालकों की चिंता और बढ़ गई है। इससे बचने के लिए वाहन चालकों को और अधिक सतर्क रहना होगा। एक दिन की भी देरी हुई तो 10 हजार रुपये का जुर्माना किए जाने सेपरिवार के लिए भी मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

1.55 बजे, मयूर विहार, फेस-टू, प्रदूषण जांच केंद्र-एक 50 वर्षीय कार चालक ने कहा कि सरकार की ओर से प्रदूषण कम करने के लिए सख्ती ठीक है। इससे वाहन मालिक और अधिक सतर्क रहेंगे।

सर्वर की सुस्ती से बढ़ी परेशानी
प्रदूषण जांच केंद्र पर मौजूद कर्मी ने बताया कि पिछले दिनों विशेष अभियान शुरू किए जाने से जांच करवाने वालों की संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ गई है। दूसरे केंद्र पर मौजूद वीर सिंह ने बताया कि जांच करवाने वालों की तादाद डेढ़ गुना से अधिक बढ़ गई है, लेकिन सर्वर के स्लो होने से सर्टिफिकेट के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।

जुर्माने की राशि का कई चालकों को नहीं है पता 
अभी भी कई वाहन चालकों को नहीं पता एक सितंबर, 2019 से ही नियंत्रित प्रदूषण का प्रमाण पत्र(पीयूसी)न होने पर वाहन चालकों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना कर दिया गया था। पहले यह राशि एक हजार थी। करीब एक साल बाद दोबारा अभियान शुरू होने की वजह से अभी भी कुछ वाहन चालकों को जुर्माने की राशि का पता नहीं है। ऐसे में जुर्माना से बचने के लिए लोग जांच के लिए अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं।

बीएस-6 मानकों का पालन जरूरी
एक पेट्रोल पंप मालिक ने बताया कि बीएस-6 वाहनों के लिए तय मानकों के मुताबिक प्रदूषण के लिए तय मानकों को लागू किया गया है। परिवहन विभाग, ट्रैफिक, डीपीसीसी सहित अन्य एजेंसियां भी इसपर कार्रवाई कर रही हैं। परिवहन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कुछ वाहनों से ईंधन के सैंपल लिए जा रहे हैं। जिन वाहनों से धुआं अधिक निकल रहा है उनपर भी कार्रवाई की जा रही है।
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