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दिल्लीः समलैंगिक लोगों का करंट से इलाज करता था ये डॉक्टर, अदालत ने किया तलब

Sat, 08 Dec 2018 03:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजधानी दिल्ली में करंट लगाकर समलैंगिक लोगों के इलाज का दावा करने वाले एक चिकित्सक को अदालत ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में अपने समक्ष हाजिर होने का आदेश दिया है।

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यह डॉक्टर दावा करता है कि समलैंगिकता एक ‘आनुवांशिक मानसिक विकृति’ है और समलैंगिक स्त्री-पुरुषों को बिजली का झटका देकर इसे ठीक किया जा सकता है। दिल्ली चिकित्सा परिषद (डीएमसी) ने डॉ. पीके गुप्ता के प्रैक्टिस करने पर रोक लगा दी थी, लेकिन वह अब भी इस अजीबोगरीब तरीके को अंजाम देता है। 

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा ने कहा कि यह डॉक्टर जो तरीका इस्तेमाल कर रहा है, उसका कोई ब्योरा चिकित्सा विज्ञान में या स्वीकृत तौर तरीकों में नहीं है। भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम के तहत उसे एक साल की सजा हो सकती है। 

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प्रैक्टिस पर रोक लगने के बाद भी वह बाज नहीं आ रहा

अदालत ने यह भी कहा कि यह भी स्पष्ट हो रहा है कि गुप्ता की प्रैक्टिस पर रोक लगने के बाद भी वह बाज नहीं आ रहा। अदालत ने डीएमसी द्वारा गुप्ता के खिलाफ उस शिकायत पर भी ध्यान दिया, जिसमें दावा किया गया है कि वह उपचार प्रदान करने के लिए हार्मोनल और झटके वाली थेरेपी का उपयोग कर रहा है।

अदालत ने अपने समन में समलैंगिकता पर उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का भी जिक्र किया है जिसमें उसने दो वयस्कों की आपसी सहमति से यौन संबंध बनाने को अपराध नहीं माना है। 

अदालत के अनुसार गुप्ता 15 मिनट की काउंसलिंग के लिए 4,500 रुपये वसूलता है और उसके बाद ही वह हार्मोनल या मनोवैज्ञानिक तरीके से इलाज करता है। जब डीएमसी ने इस डॉक्टर को नोटिस जारी किया तो उसने कहा कि वह इस परिषद से पंजीकृत नहीं है, लिहाजा वह इसका जवाब देने के लिए जिम्मेदार नहीं है। 
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