रोहिणी कोर्ट में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के मद्देनजर जिला न्यायाधीश ने सभी न्यायिक अधिकारियों से घर से काम करने और कर्मचारियों को अदालत नहीं आने का निर्देश दिया है।
पिछले कुछ हफ्तों में अदालतों में आने वाले कई कर्मचारियों और न्यायाधीशों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद 19 जून को जारी एक परिपत्र में ये निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि अगर न्यायाधीशों के पास वीडियो कांफ्रेंस के जरिए मामलों पर सुनवाई करने की तकनीकी सुविधा उपलब्ध नहीं है तो वे जिला न्यायाधीश को सूचित करें।
परिपत्र में कहा गया है कि किसी खास दिन ड्यूटी पर केवल एक या दो कर्मचारियों को ही बुलाया जाए। इसमें कहा गया है कि हालांकि स्टेनोग्राफर फोन के जरिए अपने घर से काम कर सकते हैं।
परिपत्र में आगे कहा गया है कि जहां तक पेशी का संबंध है तो अहलमद/ सहायक अहलमद/ रीडर को बारी-बारी से उनकी आपसी समझ के अनुसार सीमित अवधि के लिए बुलाया जा सकता है। साथ ही कहा गया है कि कुछ अदालतें उच्च न्यायालाय के निर्देशों के अनुसार अपने सर्वर पर रोज के आदेश अपलोड नहीं कर रही हैं।
गौरतलब है कि अदालत परिसरों में तैनात दो कर्मचारी 19 और 22 जून को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। परिपत्र में कहा गया है कि एक अधिकारी आखिरी बार 19 जून को अदालत परिसर गया था और वह न्यायाधीश की अदालत में तैनात निजी सहायक के संपर्क में आया था जबकि दूसरा अधिकारी आखिरी बार 11 जून को अदालत में गया था। उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन करने के लिए कहा गया है।
यह अधिकारी न्यायाधीश, अतिरिक्त लोक अभियोजक समेत अन्य कर्मचारियों और अदालत में तैनात एक कांस्टेबल के करीबी संपर्क में आया था। सभी को सात दिनों के लिए क्वारंटीन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले जिला न्यायाधीश आर पी पांडे भी कोविड-19 से संक्रमित पाए गए थे। उनका अदालत कक्ष भी बंद कर दिया गया है।
देश में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के कारण मार्च से दिल्ली में सभी छह जिला अदालतें सीमित तरीके से काम कर रही हैं।