दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की साइबर क्राइम यूनिट ने भारत में बैठकर अमेरिका व कनाडा समेत कई देशों के नागरिकों के साथ ठगी करने वाले एक अंतरराष्ठ्रीय कॉलसेंटर का पर्दाफाश किया है।
ये कॉल सेंटर पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके में चल रहा था। पुलिस ने कॉल सेंटर मालिक साहिल दिलावरी समेत 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी करीब एक साल में 2268 विदेशी नागरिकों से आठ करोड़ से ज्यादा रुपये ठग चुके हैं। आरोपी विदेशी पीड़ित के कंप्यूटर पर पॉप-अप्स(विज्ञापन मेल) भेजकर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी करते थे। साइबर क्राइम यूनिट इस मामले में कई कोणों से अभी भी जांच कर रही है।
साइबर क्राइम यूनिट डीसीपी अन्येश रॉय ने बताया कि एक शिकायत मिली थी कि दिल्ली के राजौरी गार्डन में अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर चल रहा है जो माइक्रोसॉफ्ट द्वारा तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर विदेशी लोगों को ठग रहे हैं। मामला दर्जकर एसीपी आदित्य गौतम की देखरेख में इंस्पेक्टर मनोज, एसआई अजीत, हरजीत व विजेन्द्र की टीम ने जांच शुरू की।
तकनीकी जांच, मोबाइल सर्विलांस व वितीय लेन-देन की जांच को पूरा करने के बाद टीम ने कॉल सेंटर पर दबिश दी। वहां पता लगा कि कॉल सेंटर फर्जी तरीके से चल रहा था। पुलिस ने जब कॉल सेंटर में दबिश दी उस समय आरोपी अमेरिका की एक डॉक्टर को ठग रहे थे। पुलिस टीम ने कॉल सेंटर मालिक सुभाष नगर साहिल दिलावरी(27) समेत 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी 11 नवंबर, 2019 से लेकर पांच नवंबर20 के बीच 2268 लोगों से आठ करोड़ रुपये से ज्यादा ठग चुके हैं।
गिरफ्तार आरोपी:
सुभाष नगर निवासी सेज सोइन, मोती नगर निवासी चैतानिया चुध, शारदापुरी निवासी योगेश चौपड़ा, जनकपुरी निवासी नितिन कुमार, टैगोर गार्डन निवासी गुरदीत सिंह, कृणा पार्क निवासी सुकेश कुमार, वीरेन्द्र नगर निवासी नमन अरोड़ा, सागरपुर निवासी संजोय पाल, महिपालपुर निवासी दीपेन्द्र सिंह, करावल नगर निवासी सुधीर शर्मा, महावीर एंक्लेव निवासी मयंक तिवारी, कृष्णा नगर निवासी गौरव सोमी, विष्णु गार्डन निवासी अवतार सिंह, उतम नगर निवासी सेरेल डैम डेविड, भारत नगर निवासी अयूष चौधरी और गीता एंक्लेव निवासी उमंग मनचंदा। सभी आरोपियों की उम्र 23 वर्ष से 30 वर्ष के बीच है।
तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के नाम पर करते थे ठगी
स्नातक डिग्री होल्डर साहिल दिलावरी पिछले तीन वर्ष से कॉल सेंटर चला रहा है। उसके ठगी के पीड़ित ज्यादातर विदेशी हैं। ये पीड़ित के कप्यूटर पर पॉप-अप्स मेल भेजते थे। इस पॉप अप्स में इनकी तकनीकी सहायता का नंबर भी होता था। ये खुद को माइक्रासॉफ्ट से बताते थे। अपने कंप्यूटर को ठीक कराने के लिए पीड़ित आरोपियों को अपने कंप्यूटर का एक्सेस दे देता था।
ये पीड़ित को कहते थे कि उनके कंप्यूटर में वायरस आ गया है। साथ में ये पीड़़ित को धमकी देते थे अगर उन्होंने कंप्यूटर को जल्द ठीक नहीं कराया तो उनके कंप्यूटर से उनके बैंक आदि की सारी जानकारी बहार चली जाएगी। ऐसे में पीड़ित इनकी तकनीकी सहायता लेने को मजबूर हो जाता था। सच होता था कि पीड़ित के कंप्यूटर में किसी तरह की कोई खराबी नहीं होती थी।
ये कंप्यूटर को ठीक करने के नाम पर पीड़ित से मोटी रकम ले लेते थे। ये खुद को माइक्रोसॉफ्ट का इंजीनियर बताते थे। कई बार ये एचपी की टेक्नीकल टीम बताते थे। आरोपियों के कंप्यूटर से 2268 लोगों से आठ करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने का डाटा बरामद हुआ है। इनके 20 कंप्यूटर जब्त किए गए हैं।