गिरफ्तार किए गए आरोपी
1. दमनदीप सिंह: जालंधर, पंजाब निवासी दमनदीप सिंह (42) जालंधर, पंजाब में पुरानी कारों की डीलरशिप का एक आउटलेट चलाता था। ये इस अंतर-राज्यीय आपराधिक गिरोह का सरगना (मास्टरमाइंड) है। इस गिरोह में वाहन चोरी, पहचान चिह्नों के साथ जालसाजी और छेड़छाड़, तथा चोरी के वाहनों को जाली दस्तावेजों के आधार पर असली बताकर दोबारा पंजीकृत करवाकर बेचना शामिल है।
2. अरविंद शर्मा: चंडीगढ़, पंजाब निवासी अरविंद शर्मा (38) पंजाब से बीटेक स्नातक है और पहले लुधियाना में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था। वर्ष 2019 से, वह चंडीगढ़ अथॉरिटी के बाहर एक एजेंट के रूप में काम कर रहा था। वह ग्राहकों के लिए वाहन पंजीकरण की फाइलें तैयार करता और जमा करता है। प्रति पंजीकरण कमीशन के तौर पर 20,000–30,000 रुपये कमाता था।
3. अमनदीप: पीतमपुरा, दिल्ली निवासी अमनदीप (39) कीर्ति नगर में फर्नीचर की एक दुकान चलाता था। अमनदीप इस गिरोह के लिए बिचौलिए और फील्ड ऑपरेटिव (मैदानी कार्यकर्ता) के रूप में काम करता था।
4. सुभाष चंद: बिलासपुरी, हिमाचल प्रदेश निवासी सुभाष चंद (40) बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में ''''पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण'''' में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। उसने दलालों के साथ मिलीभगत करके, जाली दस्तावेजों के आधार पर 350 से अधिक चोरी के वाहनों/ऋण-डिफॉल्ट (लोन न चुकाए गए) वाहनों का पंजीकरण किया।
5. मनबीर: अमृतसर, पंजाब निवासी मनबीर सिंह उर्फ मिंटा (32) गाड़ी चोरों से चोरी की गाड़ियां लेता था और उन्हें दमनदीप सिंह और दूसरों को बेच देता था। कुछ गाड़ियां वह सीधे उन खरीदारों को बेच देता था जिन्हें चोरी का शक नहीं होता था।
6. कंवरजीत: जालंधर, पंजाब निवासी कंवरजीत उर्फ जॉली (45) पुरानी (सेकंड-हैंड) गाड़ियां खरीदने और बेचने का काम करता था।
7. बृज मोहन कपूर: अमृतसर, पंजाब निवासी बृज मोहन कपूर उर्फ बॉबी (40) पुरानी (सेकंड-हैंड) गाड़ियां खरीदने और बेचने का काम करता था।
8. प्रदीप सिंह: फरीदाबाद, हरियाणा निवासी प्रदीप सिंह उर्फ हीरा (42) के पिता की बदरपुर, दिल्ली में इंजन मैकेनिक की दुकान थी। शुरू से ही उसने अपने पिता के साथ मैकेनिक के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। मैकेनिक का काम सीखने के बाद, उसने फरीदाबाद में अपनी खुद की मैकेनिक की दुकान खोली, जहाँ उसने धीरे-धीरे चेसिस नंबर पंच करना सीख लिया।
9. तिफ़्ले नौखेज: न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी तिफ़्ले नौखेज़ (43) एक नार्को सिंडिकेट का सदस्य है और नशीले पदार्थों की तस्करी में मदद करने के लिए गैर-कानूनी तरीके से हासिल की गई गाड़ियों को खरीदने और इस्तेमाल करने में सक्रिय रूप से शामिल था।
10. हेमराज सिंह: संगरूर, पंजाब निवासी हेमराज सिंह उर्फ हेमा (43) आरोपी हेमराज सिंह चोरी की गाड़ियां खरीदने वाला एक कुख्यात व्यक्ति है और अंतर-राज्यीय गाड़ी चोरी करने वाले सिंडिकेट की एक अहम कड़ी है। वह चोरी की और लोन पर ली गई, लेकिन लोन न चुकाई गई गाड़ियां लेता था और प्रदीप सिंह उर्फ हीरा के साथ मिलकर साजिश रचता था, ताकि गाड़ियों की पहचान छिपाने के लिए उनके चेसिस और इंजन नंबरों से छेड़छाड़ की जा सके। इसके बाद वह जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) में उन गाड़ियों का फर्जी तरीके से दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाता था और उन्हें पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भारी गैर-कानूनी मुनाफे पर बेच देता था। चोरी की गाड़ियों को देखने में वैध लगने वाली संपत्ति में बदलने और इस रैकेट को चलाने में उसकी भूमिका बहुत अहम थी।