कड़कड़डूमा कोर्ट ने सीएए के विरोध में उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र शरजील इमाम को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में इमाम को सख्त आतंकवाद निरोधक कानून-गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत में इमाम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने इमाम पर संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुए दंगों की पूर्व नियोजित साजिश में कथित रूप से शामिल होने का आरोप लगाया। पुलिस ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की साजिश का पता लगाने के लिए आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ आवश्यक है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कोर्ट से इमाम को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजने की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने इमाम को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
इस मामले में अन्य लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन आरोपियों में पिंजरा तोड़ की सदस्य एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा देवांगना कलीता और नताशा नरवाल के अलावा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और गुलफिशा खातून, कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर, जामिया एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी और पूर्व छात्र नेता उमर खालिद शामिल हैं। उमर खालिद को इस मामले में अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।
पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया था कि उमर और उसके साथियों ने इलाके में लोगों को दंगा भड़काने के लिए उकसाया था और यह पूर्व नियोजित साजिश थी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के निकट पिछले साल दिसंबर में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन के एक मामले में भी इमाम को इस साल 28 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था।