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Delhi: कोर्ट ने आप विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका की खारिज, जानें क्या है पूरा मामला

Wed, 15 Jan 2025 05:23 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

राउज एवेन्यू कोर्ट ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत एक मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवेदन खारिज कर दिया।
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AAP विधायक नरेश बालियान को पुलिस ने हिरासत में लिया - फोटो : facebook/Naresh Balyan
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विस्तार
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दिल्ली कोर्ट ने मकोका मामले में आप विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी। नरेश बाल्यान को चार दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने उन्हें जबरन वसूली के मामले में जमानत दे दी थी। इसके बाद आठ जनवरी को पुलिस ने इस जमानत का विरोध किया था। दिल्ली पुलिस ने कहा कि बाल्यान संगठित अपराध करने वाले गिरोह के एक सहयोगी थे। इसके बाद पुलिस ने अदालत से अर्जी लगाई थी कि बाल्यान की जमानत मकोका केस में रद्द की जाए।


राउज एवेन्यू कोर्ट ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत एक मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवेदन खारिज कर दिया। वहीं, अदालत ने बाल्यान की दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल के लिए दस्तावेज पर दस्तखत करने की मांग वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। पुलिस ने बाल्यान की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दलील दी थी कि वह संगठित अपराध सिंडिकेट में सहायक था।

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पुलिस की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अखंड प्रताप सिंह ने दलील दी कि अगर जमानत दी गई तो बाल्यान गवाहों को प्रभावित कर सकता है, सबूत नष्ट कर सकता है और जांच में बाधा डाल सकता है। उन्होंने दलील दी कि गवाहों ने कबूल किया है कि आरोपी बाल्यान कपिल सांगवान के संगठित अपराध सिंडिकेट में सहयोगी है। उसने अपराध करने के बाद सिंडिकेट के एक सदस्य को गिरफ्तारी से बचने के लिए खर्च के लिए पैसे मुहैया कराए हैं। उन्होंने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सिंडिकेट सदस्यों के खिलाफ दर्ज 16 प्राथमिकी का हवाला दिया और दावा किया कि इसने भारी मात्रा में अवैध संपत्ति अर्जित की है। इससे पहले न्यायाधीश ने आरोपी और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया था।

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