नई दिल्ली।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितताओं के आरोप में सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए उद्योगपति व लोकसभा सांसद नवीन जिंदल, पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख और अन्य आरोपियों को 17 जुलाई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। स्पेशल जज सुनेना शर्मा ने कहा कि यह कोयला ब्लॉक मामलों में सबसे अधिक विस्तृत चार्जशीट्स में से एक है, जिसे सीबीआई ने एफआईआर दर्ज होने के एक दशक से अधिक समय बाद दाखिल किया है। अदालत ने पाया कि मामले में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।
अदालत ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, इसके मैनेजिंग डायरेक्टर नवीन जिंदल, पीसी पारेख, राकेश कुमार जिंदल, राम किशोर, एसके अग्रवाल और जिंदल स्ट्रिप्स लिमिटेड (अब नलवा संस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड) को समन भेजा है। जज सुनेना शर्मा ने अपने 1 जून के आदेश में कहा कि चार्जशीट में 778 दस्तावेज शामिल हैं, जो एक लाख से अधिक पृष्ठों में फैले हैं और इसमें 234 गवाह सूचीबद्ध हैं। लंबी जांच, भारी मात्रा में दस्तावेजों और सार्वजनिक सेवकों के लिए अभियोजन स्वीकृति में लगे समय को चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी का प्रमुख कारण बताया गया।
अदालत ने आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 409 (सरकारी सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) के साथ 13(1)(सी) व 13(1)(डी) के तहत संज्ञान लिया है। धारा 13(1)(सी) संपत्ति के बेईमानी से दुरुपयोग से संबंधित है, जबकि धारा 13(1)(डी) पद का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत लाभ लेने से जुड़ी है। यह मामला 2012 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के निर्देश पर शुरू हुई प्रारंभिक जांच से निकला था। तत्कालीन सांसद संदीप दीक्षित की शिकायत पर 1993 से 2005 के बीच 24 कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कथित अनियमितताओं की जांच हुई थी।