निचली अदालत में अग्रिम जमानत याचिका पर जिरह में बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने कहा कि धन शोधन अधिनियम के कई प्रावधान संविधान का उल्लंघन हैं। उनकी वैधानिकता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। उनका मुवक्किल कई बार जांच में शामिल हो चुका है और अब भी हो रहा है, लेकिन एजेंसी चाहती है कि उनका मुवक्किल उसके मुताबिक सवालों के जवाब दे। इसके लिए रॉबर्ट वाड्रा कानूनन बाध्य नहीं हैं।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष बचाव पक्ष की ओर से वाड्रा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और अब तक कई बार एजेंसी के समक्ष पेश हो चुका है। उसके देश से भागने या शिकायतकर्ता को चोट पहुंचाने या उसे प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है। ऐसे हालात में आरोपी को अग्रिम जमानत मिलनी चाहिए।
वहीं, मनोज अरोड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर उसके वकील तनवीर अहमद मीर ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में शामिल होता रहा है और पांच फरवरी के बाद उसे पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया। अब इस केस की जांच में उसकी जरूरत नहीं है। एजेंसी ने भी अपने जवाब में उसके खिलाफ ऐसा कुछ नहीं कहा है, जिसके मद्देनजर उसे जमानत न दी जाए। एजेंसी को विदेशों से कुछ साक्ष्य मिलने हैं, लेकिन उसके लिए आरोपी को तब तक बांधकर नहीं रखा जा सकता।
निचली अदालत में वाड्रा और अरोड़ा की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के विशेष अधिवक्ता डीपी सिंह ने कहा कि संजय भंडारी की कंपनी को डिफेंस डील कराने के लिए प्लाइट्स ने 300 करोड़ रुपये दिए। वहीं, सैमसंग ने पेट्रोलियम डील की दलाली के तौर पर 10 मिलियन डॉलर दिए। इसके लिए भंडारी की कंपनी ने इन कंपनियों से एग्रीमेंट किया था।
ईडी का कहना है कि मामला लंदन में 12 ब्रायन्स्टन स्क्वायर में 19 लाख पौंड की संपत्ति से जुड़ा है। यह संपत्ति राबर्ट वाड्रा की है और इसकी खरीद के लिए फंड की व्यवस्था अरोड़ा ने की थी। एजेंसी ने कोर्ट को बताया था कि इस संपत्ति को फरार आर्म्स डीलर संजय भंडारी की कंपनी के जरिये दिसंबर 2009 में खरीदा गया था।
इस संपत्ति के लिए भुगतान भंडारी की दुबई स्थित कंपनी ने किया था। इसके बाद यह कंपनी स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट ने खरीद ली। जून 2010 में कपंनी के खाते से इसके लिए करीब 19 लाख पौंड का भुगतान हुआ। संपत्ति की खरीद के लिए यह सारी व्यवस्था मनोज अरोड़ा ने की थी।