फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने वाड्रा को अंतरिम राहत देने से किया इंकार

Mon, 25 Mar 2019 07:02 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाल, नई दिल्ली
विज्ञापन
रॉबर्ट वाड्रा - फोटो : Facebook
विज्ञापन

मनी लांड्रिंग के आरोप झेल रहे रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया। हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति हीमा कोहली और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की खंडपीठ ने वाड्रा के खिलाफ दर्ज एफआईआर और अग्रिम जमानत याचिका में दखल देने से इंकार कर दिया।

विज्ञापन


वाड्रा और अरोड़ा ने याचिका में एफआईआर के साथ ही धन शोधन रोकथाम अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है। फिलहाल अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा व मनोज अरोड़ा की याचिकाओं पर प्रवर्तन निदेशालय और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। केंद्र सरकार व निदेशालय की ओर से याचिकाओं का विरोध करते हुए एसजी तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं, क्योंकि मामले की जांच अभी चल रही है। अदालत जांच में दखल नहीं नहीं दे सकती। इसलिए इन याचिकाओं को खारिज कर देना चाहिए।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की आपत्ति पर वाड्रा व अरोड़ा को इस मुद्दे पर हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। याचिकाओं पर सुनवाई के लिए दो मई की तारीख तय की गई है। निचली अदलात में अग्रिम जमानत याचिका पर 27 मार्च को सुनवाई होगी। अदालत ने तब तक वाड्रा व अरोड़ा की गिरफ्तारी पर रोक बढ़ा दी है। मामला लंदन स्थित 19 लाख पौंड की संपत्ति की खरीद में मनी लांड्रिंग के आरोपों से जुड़ा है। इस मामले में ईडी वाड्रा से पूछताछ कर रही है। वह उनके सहयोगी मनोज अरोड़ा से पूछताछ कर चुकी है।

विज्ञापन

एजेंसी के मनमाने सवालों के जवाब देने को बाध्य नहीं

निचली अदालत में अग्रिम जमानत याचिका पर जिरह में बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने कहा कि धन शोधन अधिनियम के कई प्रावधान संविधान का उल्लंघन हैं। उनकी वैधानिकता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। उनका मुवक्किल कई बार जांच में शामिल हो चुका है और अब भी हो रहा है, लेकिन एजेंसी चाहती है कि उनका मुवक्किल उसके मुताबिक सवालों के जवाब दे। इसके लिए रॉबर्ट वाड्रा कानूनन बाध्य नहीं हैं। 

पटियाला हाउस अदालत के विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष बचाव पक्ष की ओर से वाड्रा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और अब तक कई बार एजेंसी के समक्ष पेश हो चुका है। उसके देश से भागने या शिकायतकर्ता को चोट पहुंचाने या उसे प्रभावित करने की कोई आशंका नहीं है। ऐसे हालात में आरोपी को अग्रिम जमानत मिलनी चाहिए। 

वहीं, मनोज अरोड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर उसके वकील तनवीर अहमद मीर ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में शामिल होता रहा है और पांच फरवरी के बाद उसे पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया। अब इस केस की जांच में उसकी जरूरत नहीं है। एजेंसी ने भी अपने जवाब में उसके खिलाफ ऐसा कुछ नहीं कहा है, जिसके मद्देनजर उसे जमानत न दी जाए। एजेंसी को विदेशों से कुछ साक्ष्य मिलने हैं, लेकिन उसके लिए आरोपी को तब तक बांधकर नहीं रखा जा सकता।
विज्ञापन

निचली अदालत में वाड्रा और अरोड़ा की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के विशेष अधिवक्ता डीपी सिंह ने कहा कि संजय भंडारी की कंपनी को डिफेंस डील कराने के लिए प्लाइट्स ने 300 करोड़ रुपये दिए। वहीं, सैमसंग ने पेट्रोलियम डील की दलाली के तौर पर 10 मिलियन डॉलर दिए। इसके लिए भंडारी की कंपनी ने इन कंपनियों से एग्रीमेंट किया था। 

ईडी का कहना है कि मामला लंदन में 12 ब्रायन्स्टन स्क्वायर में 19 लाख पौंड की संपत्ति से जुड़ा है। यह संपत्ति राबर्ट वाड्रा की है और इसकी खरीद के लिए फंड की व्यवस्था अरोड़ा ने की थी। एजेंसी ने कोर्ट को बताया था कि इस संपत्ति को फरार आर्म्स डीलर संजय भंडारी की कंपनी के जरिये दिसंबर 2009 में खरीदा गया था।

इस संपत्ति के लिए भुगतान भंडारी की दुबई स्थित कंपनी ने किया था। इसके बाद यह कंपनी स्काईलाइट इन्वेस्टमेंट ने खरीद ली। जून 2010 में कपंनी के खाते से इसके लिए करीब 19 लाख पौंड का भुगतान हुआ। संपत्ति की खरीद के लिए यह सारी व्यवस्था मनोज अरोड़ा ने की थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें