दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को निर्भया के दोषियों को अंगदान के लिए मनाने वाली याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका एक एनजीओ द्वारा दायर की गई थी। बता दें कि गुरुवार को निर्भया के दोषियों के अंगदान को मनाने के लिए उनसे जेल में मुलाकात करने की अनुमति के लिए एक एनजीओ ने अदालत में अर्जी दायर की गई थी। अदालत ने चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह फांसी देने का वारंट सात जनवरी को जारी किया था।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने सरकारी वकील को अर्जी पर जिरह की मोहलत प्रदान करते हुए सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की थी। यह अर्जी एनजीओ राको ने दायर की थी। इस अर्जी पर एनजीओ का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता शिवम शर्मा ने कहा कि विशेषज्ञों के समूह को दोषियों से मिलने की अनुमति प्रदान की जाए ताकि उन्हें अंगदान के लिए तैयार किया जा सके।
गौरतलब है कि दिल्ली के मुनीरका में 16 दिसंबर 2012 की रात सड़क दौड़ रही बस में एक जिंदगी चीख रही थी। वो हैवानों से गुहार लगा रही थी अपनी जान बख्शने के लिए, लेकिन छह दरिंदों को तरस नहीं आया। उन्होंने कुछ ऐसा किया जिससे सुनकर पूरी दुनिया रो पड़ी। उस लड़की के साथ दरिंदों ने न सिर्फ दुष्कर्म किया बल्कि उसके जिस्म के साथ वो खिलवाड़ किया, जिसे सुनकर देश भर के लोग सिहर उठे। दरिंदों ने लड़की के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे निर्वस्त्र हालत में चलती बस से नीचे फेंक दिया।
वारदात के वक्त पीड़िता का दोस्त भी बस में था। दरिंदों ने उसके साथ भी मारपीट की और उसे भी बस से फेंक दिया था। इसके बाद पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने जब निर्भया (बदला नाम) की हालत देखी तो वो भी रो पड़े। उनका कहना था कि आज तक उन्होंने हैवानियत की इस तरह की तस्वीर कभी नहीं देखी। निर्भया की हालत देखकर उनकी रूह भी कांप उठी।