दिल्ली में निर्माण और तोड़-फोड़ (डिमोलिशन) कार्यों से होने वाले धूल प्रदूषण पर सख्ती बढ़ाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने निर्माण स्थलों पर लगाए जाने वाले कैमरों के नए तकनीकी मानक जारी किए हैं।
इन कैमरों के जरिए निर्माण स्थलों की 24 घंटे निगरानी की जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। सभी संबंधित निर्माण परियोजनाओं में पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) नेटवर्क कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। ये कैमरे 360 डिग्री तक घूमकर पूरे निर्माण स्थल की निगरानी कर सकेंगे। डीपीसीसी के अधिकारी के अनुसार, कैमरों में कम से कम 2 मेगापिक्सल रिजॉल्यूशन होना जरूरी होगा, जबकि 4 मेगापिक्सल या उससे अधिक क्षमता वाले कैमरों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कैमरे में कम से कम 25 गुना ऑप्टिकल जूम और 16 गुना डिजिटल जूम की सुविधा होगी, जिससे दूर की गतिविधियों पर भी स्पष्ट नजर रखी जा सकेगी। साथ ही, रात के समय निगरानी के लिए कैमरों में इंफ्रारेड (आईआर) नाइट विजन की सुविधा होगी, जो लगभग 100 मीटर तक साफ तस्वीर रिकॉर्ड कर सकेगी। कैमरों का संचालन धूल, बारिश और अन्य मौसम की परिस्थितियों में भी प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें आईपी66 या उससे अधिक सुरक्षा मानक के अनुरूप होना होगा।
एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली रखेगी नजर
अधिकारी के अनुसार, कैमरे माइनस 10 डिग्री से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तापमान तक सुचारु रूप से काम कर सकेंगे। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक कैमरे की लाइव वीडियो फीड केंद्रीय निगरानी प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विश्लेषण प्रणाली से जोड़ी जाएगी। इसके लिए हर कैमरे का अलग आरटीएसपी लिंक उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा, ताकि अधिकारी किसी भी समय निर्माण स्थल की गतिविधियों की निगरानी कर सकें। कैमरे में ऑटो-रोटेशन की सुविधा भी होगी, जिससे पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
लाइव वीडियो प्रसारण में नहीं आएगी कोई बाधा
डीपीसीसी के अधिकारी के अनुसार, हर एक निर्माण स्थल पर कम से कम 10 एमबीपीएस की स्थिर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करानी होगी, ताकि लाइव वीडियो प्रसारण में कोई बाधा न आए। कैमरे ईथरनेट नेटवर्क के जरिए संचालित होंगे और उनमें आधुनिक वीडियो कंप्रेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे बेहतर गुणवत्ता के साथ डेटा का प्रसारण संभव हो सके। अधिकारियों का कहना है कि इन कैमरों की मदद से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों के पालन की निगरानी अधिक प्रभावी होगी। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता है, तो उसकी तुरंत पहचान कर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।