दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको (फाइल फोटो)
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इसलिए शुरू हुआ विरोध
कहा जा रहा है कि ब्लॉक कमेटियों को भंग करने का फैसला शीला दीक्षित ने प्रदेश प्रभारी पीसी चाको से सलाह लिए बिना लिया था। उन्होंने इसके लिए तीनों कार्यकारी अध्यक्षों से भी सलाह नहीं ली थी।
विरोधी खेमे ने आरोप लगाया कि शीला दीक्षित अस्वस्थ हैं और उनकी ओर से पार्टी के फैसले कुछ अन्य लोग ले रहे हैं। राजेश लिलोठिया ने इसके बाद ब्लॉक निरीक्षक की मीटिंग लेना शुरू कर दिया था। पार्टी कार्यालय में भी लगातार वो उपस्थित रहते थे।
शीला दीक्षित का मत है कि लंबे समय से ब्लॉक कमेटी के विभिन्न पदों पर बैठे और परिणाम न दे रहे कार्यकर्ताओं को हटाकर नए लोगों को मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन हारुन यूसुफ और कुछ अन्य नेता अपने क्षेत्रों के कुछ लोगों को पदों पर बनाए रखना चाहते हैं क्योंकि उनका कहना है कि इन्हीं कार्यकर्ताओं के दम पर पार्टी ने लंबे समय तक राज किया है।
वे अपने क्षेत्रों में आज भी प्रभावशाली हैं। उन्हें हटाना पार्टी के लिए घाटे का सौदा हो सकता है। अपने लोगों को 'सेट' करने की इस कोशिश पर शीला दीक्षित ने इनकार कर दिया जिससे दोनों खेमों में दूरी बढ़ गई।