दिल्ली कांग्रेस ने कहा है कि दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने का दावा कर भ्रम फैला रही है। प्रदूषण फ्री दिल्ली करने की योजना सिर्फ कागजी है। सरकार यह तो दावा कर रही है कि वाशिंगटन विश्वविद्यालय के साथ मिलकर प्रत्येक दो घंटे पर वायु प्रदूषण के कारकों का पता लगा लेगी। जिसके मॉडल पर भी चर्चा करती है, लेकिन रिपोर्ट नहीं जारी कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने बताया कि दिल्ली सरकार प्रदूषण कम करने के लिए नए मॉडल को जून 2020 तक तैयार करने की योजना थी। लेकिन यह योजना हवा हवाई साबित हुई है। पराली जलाने पर किसानों को वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराना कहीं से उचित नहीं है।
दिल्ली में प्रदूषण के प्रमुख कारकों का पता लगाने के लिए 2015 में आईआईटी दिल्ली और 2018 में एनर्जी रिसोर्स इंस्टीट्यूट ने अध्ययन किया था। दोनों संस्थाओं ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए मुख्य कारक वाहन प्रदूषण का बताया। इसके बावजूद दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया।
इलेक्ट्रिक वाहन को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल सरकार अगर इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर संवेदनशील होती तो 1000 इलेक्ट्रिक बस लाने को लेकर कई बार घोषणाएं नहीं करती। दिल्ली की सड़कों पर यह बस दौड़ रही होती। हकीकत यह है कि एक भी बस नहीं आई।
दिल्ली सरकार पराली जलाने को प्रदूषण का मुख्य कारण बताने के लिए गलत आंकड़े पेश कर रही है, जबकि सच तो यह है कि वर्ष 2019 में भारत सरकार के सफर पोर्टल के अनुसार काफी कम था। पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में स्मॉग टावर लगाने के आदेश दिए थे, लेकिन आज तक एक भी स्मॉग टावर नहीं लगाया गया।