मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास भी बिजली कटौती की शिकायतें आईं, तो उन्होंने सुबह ट्वीट करके आश्वस्त किया कि आज कुछ करेंगे। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय पहुंचकर अधिकारियों की बैठक ली, फिर मुख्य सचिव को निर्देश जारी किया कि बिजली की कमी नहीं है। उपभोक्ता बिल भी देते हैं, तो उन्हें 24 घंटे बिजली मिलनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से बिजली कटौती की शिकायतें मिल रही हैं। मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी शिकायतें आई हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक करके मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि तीनों बिजली वितरण कंपनियां शिकायत सुनने के लिए कॉल सेंटर में सीटें बढ़ाएं। शिकायत नंबर का प्रचार करें। जो शिकायतें आएं, सभी सुनें और उसका अध्ययन करके रिपोर्ट बनाएं कि शिकायतें क्यों आईं? मुख्यमंत्री को रोजाना सुबह 11 बजे रिपोर्ट दें।
उन्होंने मुख्य सचिव को दिए निर्देश में कहा है कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति वितरण कंपनियों की जिम्मेदारी है। 50 लाख उपभोक्ता हैं, जो बिजली बिल भी देते हैं। राजधानी में 24 घंटे बिजली उन्हें मिलनी चाहिए। सोमवार को 6361 मेगावाट बिजली की मांग का रिकॉर्ड रहा, लेकिन बिजली की कमी की वजह से कटौती नहीं हुई है। सरकार के पास 8000 मेगावाट तक मांग पूरी करने की व्यवस्था है।
बिजली वितरण कंपनियों की आपूर्ति लाइन में दिक्कत की वजह से कटौती हुई। उसे ठीक किया जाए। बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि देश में सिर्फ दिल्ली और मुंबई ही ऐसे महानगर हैं, जहां बिजली आपूर्ति 99 फीसदी तक है। जहां कहीं लाइन की वजह से दिक्कत है, उसे ठीक करने को कहा है। समर एक्शन प्लान आठ महीने पहले बनाया गया था।
वहीं, सिसोदिया ने कहा कि फरवरी में रखरखाव के काम के लिए निर्धारित बिजली कटौती होती है। इस समय नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश में कहा है कि फिर भी जरूरी है, तो निर्धारित बिजली कटौती की सूचना बिजली वितरण कंपनियां अपनी वेबसाइट पर डालें।
उपभोक्ताओं को एमएमएस करके सूचना दें। बिना निर्धारित बिजली कटौती न हो, इसके लिए वितरण का सिस्टम दुरुस्त रखें। बिना निर्धारित बिजली कटौती की सूचना भी उपभोक्ताओं को कारण समेत एसएमएस करके बताएं।