बाएं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, दाएं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ।
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दिल्ली विधानसभा में इन दिनों बजट सत्र चल रहा है। आज दिल्ली के मुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सदन में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी की चुटकी ली। केजरीवाल ने कहा कि मैं अभी कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो देख रहा था, उसमें यूपी के सीएम योगी जी एक स्कूल का नीरिक्षण करने गए थे। वह क्लास बहुत आर्टिफिशियल लग रही थी क्योंकि वहां 12 कुर्सियां तो थीं लेकिन टेबल नहीं थे, जिससे पता चल रहा था कि वो क्लास खासतौर से बनाई गई है।
वह आगे बोले कि मुझे खुशी हुई ये देख के कि सरकारों को मुख्यमंत्रियों को अब स्कूलों के अंदर जाना पड़ रहा है। इसकी एक भूमिका है कि सीएम योगी स्कूल क्यों गए। वीडियो आने के कुछ दिन पहले ही योगी जी के कुछ मंत्रियों ने मनीष सिसोदिया को चुनौती दी थी कि वो यूपी में आएं शिक्षा पर हमसे वाद-विवाद करें, हम उन्हें यहां के अच्छे स्कूल दिखाएंगे। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें लगा सिसोदिया जी नहीं जाएंगे लेकिन वो पहुंच गए लखनऊ वाद-विवाद के लिए। वो मैदान छोड़कर भाग गए और सिसोदिया जी पूरे दिन इंतजार करते रह गए।
केजरीवाल ने कहा कि जब कोई नहीं आया तो सिसोदिया जी खुद ही निकल गए स्कूल देखने लेकिन बीच में उन्हें पुलिसवालों ने रोक लिया। उसके बाद यूपी पुलिस और सरकार की बहुत थू-थू हुई और मीडिया ने ही जा-जाकर पूरी दुनिया को यूपी के स्कूल दिखा दिए। यहां तक कि गोरखपुर के स्कूलों की भी बुरी हालत दिखाई। तब जाकर यूपी के सीएम को लगा कि स्कूल में जाना पड़ेगा और फिर वह स्कूल गए।
दिल्ली में पिछले छह साल में शिक्षा के क्षेत्र में जो काम हुआ है उसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। गरीबों के बच्चे भी अच्छी से अच्छी शिक्षा पा रहे हैं। देश में आजादी के 70 सालों में दो पार्टियों ने राज किया और ये वो बदलाव शिक्षा के क्षेत्र में नहीं ला सके जो आम आदमी पार्टी की सरकार ने पांच साल में लाए।
केजरीवाल ने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि दोनों पार्टियों ने षड्यंत्र के तहत शिक्षा व्यवस्था को बदहाली में रखा गया है। क्योंकि ये जानते थे कि ये बच्चे अनपढ़ रहेंगे तो ये पिछड़े, बेरोजगार रहेंगे। इससे अमीरों को सस्ते में लेबर मिलेगी, भाड़े पर रैली में लोग बुलाए जा सकेंगे। लोग अनपढ़ रहेंगे तो इनसे सवाल पूछने वाला कोई नहीं होगा। केजरीवाल का कहना है कि जैसा काम दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में छह साल में हुआ है पूरे देश में हो जाए तो इन दोनों पार्टियों की एक भी सीट नहीं आएगी।