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पराली के मुद्दे पर केजरीवाल ने प्रकाश जावड़ेकर को लिखा पत्र, आईसीएआर द्वारा विकसित तकनीक का किया जिक्र 

Sat, 26 Sep 2020 03:32 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter @CMODelhi
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात का समय न मिल पाने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सर्दियों में दिल्ली को पराली के धुएं से बचाने के लिए उनको पत्र लिखा है। शनिवार को भेजे गए पत्र में केजरीवाल ने पराली के निपटारे के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा की नई तकनीक का जिक्र किया है। साथ ही अपील की है कि केंद्र सरकार दिल्ली के पड़ोसी राज्यों को इस तकनीक के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए प्रेरित करे।

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उधर, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार शाम बताया कि उनकी फोन पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से बात हो गई है। जावड़ेकर ने ट्वीट किया कि उन्होंने केजरीवाल को बताया है कि संबंधित राज्यों के साथ इस बारे में एक बैठक होनी है। केंद्र ने अभी तक वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में बहुत से कदम उठाए हैं। इसका नतीजा दिल्ली में प्रदूषण स्तर में कमी के तौर पर सामने आया है।

इससे पहले बृहस्पतिवार को संस्थान में जाकर तकनीक देखने अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करने की बात कही थी। इसके में दिल्ली सरकार की तरफ से समय भी मांगा गया था। लेकिन मुलाकात संभव नहीं हो सकी। केजरीवाल ने अपने पत्र में इसका जिक्र किया है। साथ ही याद दिलाया है कि वह पराली के धुएं से दिल्ली को होने वाली परेशानी के मसले में मुलाकात करना चाहते थे।
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अरविंद केजरीवाल ने पूसा के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की तकनीक का जिक्र करते हुए लिखा है कि इसमें बनाए गए केमिकल के छिड़काव से पराली खेत में ही गलकर खाद बन जाती है। इससे दोहरा फायदा मिलेगा। एक तरफ पराली न जलाने से वायु प्रदूषण नहीं होगा और खेती की उर्वरता खत्म नहीं होगी। वहीं, पराली जैविक खाद का काम करेगी। केजरीवाल का मानना है कि यह पराली के निपटान का बेहतर तरीका है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार इस साल बड़े स्तर पर इस तकनीक का इस्तेमाल करेगी। इससे सुनिश्चित होगा कि पराली जलाई नहीं जाएगी। केजरीवाल ने आगे लिखा है कि इस साल देर हो गई है। लेकिन कोशिश करने पर अभी भी पराली जलाने से कुछ हद तक  बचा जा सकता है। केजरीवाल ने अपील की है कि जितना संभव हो सके, पड़ोसी राज्यों के किसानों के ज्यादा से ज्यादा तकनीक के इस्तेमाल को प्रेरित किया जाए। हालांकि, उनका मानना है कि केंद्र सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर अभी भी इस दिशा मे काम कर रही है, लेकिन जोर मशीनें खरीदने पर है। आखिर में केजरीवाल न फिर दोहराया है कि जब भी समय मिलेगा, वह केंद्रीय मंत्री से इस बारे में मुलाकात करेंगे।

बड़ी मात्रा में जलाई जाती पराली
पिछले साल पंजाब में 2 करोड़ टन पराली हुई थी। इसमें से करीब पचास फीसदी पराली किसानों से जला दी थी। जबकि 70 लाख टन में से हरियाणा के किसानों ने 12.3 लाख टन पराली जलाई थी। किसानों को कहना है कि पराली के प्रबंधन की कीमत बहुत ज्यादा होने से उनको मजबूरन इसे जलाना पड़ता है। उधर, राज्य सरकारें व सहकारी समितियां किसानों को 50 से 80 फीसदी तक सब्सिडी मशीन खरीदने के लिए देती है। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका बड़ा असर नहीं दिखता है।
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