दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को विधानसभा में एक कहानी सुनाई। इस कहानी के सहारे उन्होंने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। उन्होंने केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया और अदाणी विवाद पर भाजपा को कटघरे में खड़ा किया। केजरीवाल ने यह संबोधन सीबीआई द्वारा उनसे नौ घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद किया है। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार पर हमला करने के लिए दिल्ली विधानसभा के मंच का दुरुपयोग करते हैं। पार्टी ने इसे संवैधानिक संस्थाओं का आरोप लगाया।
एक दिवसीय विधानसभा सत्र को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, "एक बार एक ज्योतिषी ने एक मां से कहा कि उसका बेटा एक दिन राजा बनेगा। बेटे ने चौथी तक पढ़ाई की और एक स्टेशन पर चाय बेचने लगा। बाद में वह राजा बन गया तो सभी संपत्तियों को अपने दोस्त को दे दिया।"
केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला उठाते हुए उन्होंने इशारों में कहा कि राजा के खिलाफ जो भी बोलता था, उसे जेल में बंद कर दिया जाता था। कहानी में उन्होंने स्वयं को ईमानदार मुख्यमंत्री बताते हुए जनता के लिए बेहतर काम करने वाला नेता बताया। लेकिन कहा कि इसके बाद से ही वह राजा के निशाने पर आ गया और उसे प्रताड़ित किया जाने लगा।
'मोदी को गाली देने के लिए विधानसभा का दुरुपयोग'
भाजपा नेता और सांसद प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर हमला करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देने के लिए विधानसभा के मंच का इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि इसके पहले भी अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा का सत्र बुलाकर प्रधानमंत्री मोदी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, इस बार भी वे यही काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक लोग अरविंद केजरीवाल की सच्चाई नहीं जानते थे, उनके ये आरोप चल जाते थे, लेकिन शराब घोटाले-शिक्षा घोटाले और हर विभाग में भ्रष्टाचार के मामले सामने आने के बाद अब उन पर कोई विश्वास नहीं करता। भाजपा नेता ने पूर्व में मुख्यमंत्री को चुनौती दी थी कि यदि अरविंद केजरीवाल को अपने बयानों में सच्चाई नजर आती है और उनमें हिम्मत है तो उन्हें प्रधानमंत्री पर यही आरोप विधानसभा के बाहर लगाकर दिखाना चाहिए।
विधानसभा में क्यों बोलते हैं मुख्यमंत्री
दरअसल, विधानसभा या संसद के मंच पर दिए गए किसी भाषण के लिए जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती। संविधान में यह व्यवस्था इसलिए की गई थी कि जिससे जनप्रतिनिधि बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। भाजपा का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल इसी व्यवस्था का लाभ उठाते हुए प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हैं और उन पर आधारहीन टिप्पणी करते हैं।