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राजनीतिक इच्छा शक्ति से भी प्रदूषण की समस्या का निदान हो सकता है: अरविंद केजरीवाल

Wed, 07 Oct 2020 10:24 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल - फोटो : ANI
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डेयरिंग सिटीज-2020 सम्मेलन को संबोधित किया। वर्चुअल सम्मेलन में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण की दोहरी समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों से विश्व को अवगत किया। 

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बताया कि ऑड-ईवन, इलेक्ट्रिक वाहन, पौधा रोपण, इलेक्ट्रिक वाहनों के सहारे किस तरह से दिल्ली में 25 प्रतिशत प्रदूषण की कमी लाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली को इलेक्ट्रिक वाहनों की राजधानी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

पराली की वजह से वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए उठाए गए कदम से भी विश्व को अवगत किया। कहा कि बायो डीकंपोजर तकनीक को सरकार बढ़ावा दे रही है। इस तकनीक से पराली जलाने की मजबूरी किसानों को नहीं होगी। केमिकल घोल के छिड़काव से पराली को खाद में बदला जा सका। 
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सम-विषम योजना पर कहा कि इस योजना को कई देशों ने लागू किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। दिल्ली में भी इसे लागू किया गया। दिल्ली की जनता ने इसमें सहयोग किया। क्योंकि जब यह योजना लागू की जा रही थी तो कई तरह का राजनीतिक दबाव था। इसे आत्मघाती भी बताया गया था। 

इसके बावजूद राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखा कर इस योजना को लागू किया गया। यह एक साहसिक नीति है जिसे कई देशों में आजमाया गया, लेकिन वहां विफल रही। लेकिन दिल्ली वालों का समर्थन मिला। चालान की संख्या कम होने से साफ हो गया कि इसमें लोगों का भी सहयोग था। 

इस योजना के लागू करने से उत्सर्जन में 14-16 प्रतिशत की गिरावट हुई है। बताया कि दिल्ली देश का एकमात्र राज्य है जहां कोयले से चलने वाले सभी थर्मल पावर प्लांट बंद करा दिए गए हैं। प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। भाषण की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डेयरिंग सिटीज 2020’ सम्मेलन में बोलने के लिए आमंत्रित करना एक सम्मान की बात है। मुझे खुशी है कि जर्मनी सरकार के सहयोग से आईसीएलईआई और बॉन शहर ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक आयोजन की पहल की। 

जब दुनिया भर में सरकारें कोरोना वायरस जैसी महामारी को नियंत्रित करने में जुटी हैं, उस समय में जलवायु परिवर्तन जैसे बड़े मुद्दे के ऊपर भी यथासंभव ध्यान देने की आवश्यकता है। हमें जलवायु आपातकाल से निपटने के लिए दृढ़ बने रहने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारें वायु प्रदूषण के मुद्दे को हल करने का प्रयास करें तो दिल्ली भी इसके लिए तैयार है। पिछले साल एक और थर्मल पावर प्लांट को बंद किया गया जो 45 एकड़ भूमि पर स्थित था इसका उपयोग सौर पार्क विकसित करने के लिए किया जाएगा। 

पांच मेगावाट अक्षय उर्जा का यहां से उत्पादन होगा। सरकार ने उद्योग में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले भट्टी के तेल, पेट कोक जैसे ईंधनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिल्ली में हर साल 30 लाख से अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं। 2019-20 में 36 लाख से अधिक पौधा लगाया गया। 

 
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दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में 80 फीसदी का विस्तार किया गया है। अगले पांच वर्षों में सार्वजनिक बसें दोगुनी करने की योजना है। 50 प्रतिशत बसें इलेक्ट्रिक होंगी। 2024 तक नए वाहनों का 25 फीसदी बिजली चलित वाहन होंगे।

जर्मनी के बॉन शहर द्वारा की गई ‘डेयरिंग सिटीज’ जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करने के लिए बोगोटा (कोलंबिया), साओ पाओलो (ब्राजील), लॉस एंगल्स (यूएसए) और एंटेब्बे (युगांडा) के शहरी नेताओं समेत 10 हजार से अधिक मेयर, नगर पार्षदों, शहरी विचारक, राष्ट्रीय सरकार के प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं, व्यापार जगत के नेता इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
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