उत्तर भारत में सबसे ज्यादा दिल्ली के बच्चों में कैंसर की बीमारी देखने को मिल रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दिल्ली के लोगों में कैंसर के प्रति जागरुकता के लिहाज से एक सोशल अभियान भी छेड़ा है जिसमें लोगों को अपने बच्चों में कैंसर से बचाव के तरीके बताए जा रहे हैं।
आईसीएमआर के अनुसार देश के उत्तरी राज्यों में दिल्ली एकमात्र है जहां सबसे ज्यादा बाल कैंसर के मरीज मिल रहे हैं। नेशनल कैंसर रजिस्ट्रीय प्रोग्राम रिपोर्ट 2020 के मुताबिक देश में सालाना मिलने वाले कैंसर मरीजों में 2.5 फीसदी भागेदारी बच्चों की है। ल्यूकेमिया और लिंफोमा नामक दो कैंसर सबसे ज्यादा बच्चों में मिल रहे हैं। उत्तरी भारत में दिल्ली में सबसे ज्यादा ये मरीज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नियमित जांच के जरिए बच्चों को कैंसर की घातक बीमारी से बचाया जा सकता है।
आईसीएमआर के ही अनुसार 0 से 14 और 0 से 19 वर्ष की आयु के दो वर्गों में कैंसर रोग मिल रहा है। दिल्ली की बात करें तो यहां लड़कों में 4.7 तो लड़कियों में 2.6 फीसदी कैंसर मिल रहा है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच दिल्ली में 60 हजार से अधिक कैंसर ग्रस्त बच्चे मिल चुके हैं। स्थिति यह है कि प्रति 10 लाख लड़कों में से 203 और 125 बच्चियों में कैंसर रोग मिल रहा है। इस स्थिति को नियंत्रण में भी लाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए समय पर उपचार और जांच बेहद जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 0 से 14 वर्ष तक की आयु के लड़कों में प्रति 10 लाख की आबादी पर 84 में ल्यूकेमिया कैंसर मिल रहा है जोकि रक्त कोशिकाओं से जुड़ी बीमारी है। जबकि 10 लाख में से 47 लड़कियों में यह कैंसर मिल रहा है। शरीर में सफेद रक्तकोशिकाओं की मात्रा अत्यधिक होने पर कैंसर की स्थिति देखने को मिलती है।