प्लाज्मा थेरेपी का कोरोना मरीजों पर कितना कारगर असर होता है, इसे लेकर विशेषज्ञों में अब तक विवाद है। लेकिन कई माइल्ड स्टेज के मरीजों पर इसका सकारात्मक असर देखा गया है।
प्लाज्मा हमारे खून का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है। रक्त देने के लिए एक स्वस्थ व्यक्ति को तीन महीने तक का इंतजार करने की सलाह दी जाती है।
लेकिन प्लाज्मा देने के लिए एक स्वस्थ हो चुका मरीज अपनी शारीरिक स्थिति के हिसाब से एक हफ्ते में एक या दो बार प्लाज्मा दान कर सकता है।
इससे उसके शरीर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
कोरोना बीमारी के संक्रमण के बाद स्वस्थ हुए व्यक्ति के शरीर से एक बार में 450 मिली तक प्लाज्मा निकाला जा सकता है।
एक कोरोना मरीज को 200 मिली तक प्लाज्मा चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इस प्रकार एक व्यक्ति का प्लाज्मा दो मरीजों के लिए पर्याप्त होता है।
दिल्ली देश के उन चंद राज्यों में शामिल था जिसे केंद्र की ओर से मरीजों पर प्लाज्मा ट्रायल की अनुमति मिली थी। पहले परीक्षण में ही इसके बेहतर परिणाम हासिल हुए थे।
इसे देखते हुए ही दिल्ली को अब 200 अन्य मरीजों पर ट्रायल की अनुमति मिल गई है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में 35 में से 34 मरीजों पर इसका ट्रायल सफल रहा है। इसके आलावा प्राइवेट अस्पतालों में 49 में से 46 लोगों पर प्लाज्मा ट्रायल सफल रहा है।
अब पूर्वी दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में इसका एक बैंक बनाया जाएगा, जहां कोई भी मरीज डॉक्टर या अस्पताल की लिखित सलाह के बाद प्लाज्मा प्राप्त कर सकेगा।
यह सेंटर अगले दो दिन में काम करने के लिए तैयार हो जायेगा। प्लाज्मा दानदाताओं को सेंटर तक लाने और उन्हें सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार उठाएगी।
दिल्ली में अब तक रिकॉर्ड 52,000 मरीज कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। ये सभी लोग प्लाज्मा दान करें तो दिल्ली में प्लाज्मा का एक बड़ा बैंक बन सकता है और इससे लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।