दिल्ली के स्कूलों में संविदा पर काम कर रहे प्रवासी कश्मीरी अध्यापकों के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला किया है। सरकार ने सभी अध्यापकों को स्थायी कर दिया है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने भर्ती नियमों में तीन तरह की छूट दी है। दिल्ली कैबिनेट ने बुधवार को इस पर मुहर लगा दी। इसके साथ ही चार अन्य फैसलों को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी।
शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि 1994 से शिक्षा विभाग में संविदा पर काम कर रहे प्रवासी कश्मीरी अध्यापकों को स्थायी कर दिया है। शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए भर्ती नियमों में छूट दी जा रही है। इस तरह के अध्यापकों को स्थायी करते वक्त उम्र की सीमा नहीं होगी।
वहीं, सीधी भर्ती प्रक्रिया का नियम भी इन पर लागू नहीं होगा। इसके अलावा सीटीईटी की बाध्यता भी प्रवासी कश्मीरी अध्यापकों पर नहीं रहेगी। सिसोदिया ने बताया कि इसका फायदा 170 अध्यापकों को मिलेगा। इससे सरकार को सालाना 13 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।
आईएलबीएस के विस्तार को मंजूरी, 550 बेड का होगा संस्थान
दिल्ली कैबिनेट ने बुधवार को इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बाइलियरी साइंस (आईएलबीएस -यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान) के विस्तार को भी मंजूरी दे दी। दूसरे फेज में न सिर्फ बेड की संख्या बढ़ेगी, बल्कि सुविधाओं का भी विस्तार होगा। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि संस्थान में फिलहाल 155 बेड हैं। फेज दो पूरा होने के बाद इनकी संख्या 549 हो जाएगी। कैबिनेट ने दूसरे फेज के तहत होने वाले विस्तार के बजट का भी पुनर्मूल्यांकन किया। इसमें 389 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 497.72 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
फेज दो के लिए डीएमआरसी, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य निदेशालय व आईएलबीस के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि फेज दो पूरा होने पर बेड की संख्या बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं मेें भी विस्तार होगा। इससे संस्थान सुपर स्पेशिलिटी सुविधाओं से लैस होगा। वहीं, शैक्षिक व प्रशिक्षण की सुविधाएं भी बढ़ेंगी। जबकि सेमी ऑटोमेटेड पार्किंग भी तैयार होगी।