नंद नगरी इलाके में नोटबंदी के बाद से कर्ज में में चल रहे एक गारमेंट कारोबारी ने फांसी लगाकर जान दे दी। मृतक की शिनाख्त इकरार हुसैन (52) के रूप में हुई है। पुलिस को मृतक के पास से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
इकरार के परिजनों का आरोप है कि नोटबंदी के बाद इकरार ने तैयार माल को मार्केट में सप्लाई कर दिया। लेकिन नोटबंदी का हवाला देकर उसके माल की पेमेंट रोक ली गई। कर्ज से परेशान इकरार डिप्रेशन का शिकार हो गया।
मंगलवार उसने अपनी नंद नगरी स्थित फैक्टरी में फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद इकरार का शव परिवार को सौंप दिया है। परिजनों से पूछताछ कर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, इकरार अपने परिवार के साथ बी-37, डीएलएफ, साहिबाबाद में रहते थे। परिवार में पत्नी हमीदा बानो, दो बेटे इमरान और सलमान हैं। इकरार की जे-3, सुंदर नगर में रेडीमेड गारमेंट बनाने की फैक्टरी थी। इसका तैयार माल जनपथ व नोएडा में सप्लाई हो रहा था।