दिल्ली पुलिस से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, इस बिल्डिंग में एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी (पेइंग गेस्ट) के तौर पर किया जा रहा था। जब बिल्डिंग गिरी, तब बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। अब तक छह लोगों को बचाया गया है और अस्पतालों में पहुंचाया गया है। खोज और बचाव अभियान जारी है।
इलाके के एक निवासी का कहना है, 'इस इलाके में ऐसी यह दूसरी घटना है, इससे पहले भी एक इमारत गिर चुकी है। नियम के मुताबिक सिर्फ दो या तीन मंजिलें ही बनाई जा सकती हैं, लेकिन इन लोगों ने पांच मंजिलें बना ली थीं। यह गैर-कानूनी निर्माण था। बेसमेंट में काम चल रहा था, जिसकी वजह से इमारत गिर गई। मैं खाना खा रहा था, तभी अचानक सोफा हिलने लगा। मुझे सच में ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो। जब मैं बाहर निकला, तो मैंने धुआं देखा और फिर पता चला कि इमारत गिर गई है। उस इमारत में कम से कम 40 लोग रह रहे थे।"
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ, डीडीएमए, दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस, एमसीडी और सिविल डिफेंस की टीमें पूरे समन्वय के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं और लोगों को सुरक्षित निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
40 से 50 साल पुरानी थी इमारत
मोती बाग हादसे को लेकर दिल्ली पुलिस ने अहम खुलासे किए हैं। पुलिस की शुरुआती जांच (लोकल इंक्वायरी) के अनुसार, यह इमारत 40 से 50 साल पुरानी थी। इसमें एक बेसमेंट और पांच ऊपरी मंजिलें थीं, जिसका इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी (पेइंग गेस्ट) के रूप में किया जा रहा था।