बजट सत्र की शुरुआत सोमवार को विधानसभा परिसर में खीर समारोह के साथ हुई। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि विकसित दिल्ली बजट से खीर की मिठास जैसा विकास होगा। आज प्रभु राम को यह खीर का भोग लगाकर हम विकसित दिल्ली बजट की शुरुआत करने जा रहे हैं। बजट तैयार करने के लिए हमने महिलाओं, शिक्षाविदों, व्यापारियों, औद्योगिक संगठनों, किसानों, विधायकों, सांसदों, युवाओं, डॉक्टरों, सीए, पार्षदों, झुग्गी निवासियों सहित हर वर्ग के साथ संवाद किया है। मुख्यमंत्री के पास वित्त विभाग भी है। वह सुबह 11 बजे बजट पेश करेंगी। सरकारी सूत्रों के मुताबिक विधानसभा में पेश होने वाला 2025-26 का बजट 80,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है।
'यह वैसा ही क्षण है जैसे भगवान राम वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे'
हमारी सरकार का 27 वर्षों का वनवास समाप्त हुआ है और यह बजट दिल्ली के विकास की नई कहानी लिखने का माध्यम बनेगा। यह वैसा ही क्षण है जैसे भगवान राम 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। -रेखा गुप्ता, सीएम
रोजगार पर होगा जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने और रोजगार सृजन पर जोर दिया जाएगा। सरकार को ईमेल और व्हाट्सएप पर लोगों से 10,000 से अधिक सुझाव मिले हैं।
पहले दिन डीटीसी पर पेश कैग रिपोर्ट पर हुई चर्चा
दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो गया। पहले दिन भाजपा व आम आदमी पार्टी के बीच टकराव के साथ शुरू हुआ। बाद में दिल्ली विधानसभा को स्थगित कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने सत्र के पहले दिन दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) पर कैग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखा। वहीं मुख्यमंत्री व भाजपा के कई विधायकों ने विधानसभा की विभिन्न समितियां गठित करने का प्रस्ताव पास किया। इसके अलावा कैग रिपोर्ट पर चर्चा कराई गई। हालांकि आप ने रिपोर्ट प्रस्तुत करते ही उस पर चर्चा कराने का विरोध किया। इतना ही नहीं, आप विधायकों ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। जबकि भाजपा विधायकों ने आप की पूर्ववर्ती सरकार पर हमला बोला और डीटीसी के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
इस मौके पर मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कैग रिपोर्ट में बस परिचालन बढ़ती लागत और सरकारी अनुदानों में वृद्धि के बावजूद राजस्व में गिरावट जैसे मुद्दे उजागर हुए हैं। जबकि केजरीवाल यह कहकर सत्ता में आए थे कि वह भ्रष्टाचार खत्म करेंगे, लेकिन आज किसी भी विभाग की फाइल खोलो तो उसमें सिर्फ भ्रष्टाचार ही नजर आता है। इससे पहले भाजपा विधायक हरीश खुराना ने चर्चा की शुरूआत करते हुए आप सरकार पर डीटीसी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
खुराना ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना व साहिब सिंह के कार्यकाल में डीटीसी लाभ में था, लेकिन आप सरकार के दौरान यह 8498 करोड़ के घाटे में चला गया, जिसमें से 5000 करोड़ का घाटा आप सरकार के दौरान बढ़ा। कैग रिपोर्ट को लेकर विपक्ष की नेता आतिशी ने विस्तृत चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सोमवार को पेश की गई है, इसलिए सभी सदस्यों को इसे पढ़ने का समय दिया जाना चाहिए। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने चर्चा टालने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि हम इस रिपोर्ट पर परसों भी चर्चा जारी रखेंगे, लेकिन आज भी कुछ सदस्यों को इस पर बोलने का मौका मिलेगा।
दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि नीली छतरी वाले मंदिर की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि मंदिर की एक भी ईंट नहीं हटेगी और यदि कोई संरचनात्मक क्षति हुई है तो दोबारा बनवाया जाएगा। स्थानीय लोगों से कहा की इस मामले का राजनीतिकरण न करें।
पटाखों पर प्रतिबंध हटाने की मांग विधायकों ने अनेक मुद्दे उठाए
विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू हो गया। पहले ही दिन सदन में कई मुद्दों पर गरमागरम बहस देखने को मिली। भाजपा विधायक जितेंद्र महाजन ने दिल्ली में हिंदुओं के त्योहारों पर ग्रीन पटाखों पर प्रतिबंध हटाने की मांग उठाई। वहीं, आप के विधायकों ने महिलाओं को प्रतिमाह ढाई हजार रुपये देने की शुरूआत नहीं होने का मामला उठाने का अवसर न मिलने पर सदन का बहिष्कार कर दिया।
भाजपा विधायक जितेंद्र महाजन ने नियम 280 के तहत बोलते हुए कहा कि दिवाली और अन्य हिंदू त्योहारों पर पटाखे जलाना हमारी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने पिछली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदूषण के नाम पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाकर हिंदू त्योहारों को निशाना बनाया गया था। महाजन ने कहा कि पिछली सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देकर पूरे 365 दिन पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। ग्रीन पटाखों से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है, लेकिन इस प्रतिबंध के चलते उनका रोजगार छिन गया। उन्होंने मांग की कि दिल्ली में भी अन्य राज्यों की तरह ग्रीन पटाखों की अनुमति दी जाए।
आप विधायकों का बहिष्कार सदन में भाजपा और आप विधायकों के बीच टकराव देखने को मिला। भाजपा विधायक गजेंद्र दराल ने किसानों को सब्सिडी देने की मांग उठाई और आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने किसानों के लिए कोई राहत योजना लागू नहीं की। वहीं, आप विधायक चौधरी जुबेर अहमद ने महिला समृद्धि योजना के तहत महिलाओं को 2,500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा पूरा न करने का मुद्दा उठाया और भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। जबकि भाजपा विधायक नीलम पहलवान ने नजफगढ़ में जलभराव की समस्या पर चर्चा की। उनके बाद आप विधायक प्रेम चौहान भी महिला समृद्धि योजना बोलना चाहते थे। मगर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी और भाजपा विधायक अनिल शर्मा को बोलने के लिए आमंत्रित किया। इस पर आप विधायकों ने नाराजगी जताई और सदन में हंगामा किया। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि एक मुद्दे को बार-बार उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद आप विधायकों ने विरोध जारी रखा और सदन से वाकआउट कर दिया
विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं, भाजपा और आप आमने-सामने
विधानसभा में सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं हो सका। इस बारे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस बार बजट सत्र में आर्थिक सर्वेक्षण पेश नहीं किया जाएगा, क्योंकि कई विभागों की ऑडिट रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हुई है। इसके अलावा तत्कालीन आम आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल की समीक्षा करते हुए एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) भी जारी किया जाएगा। भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक अभय वर्मा ने कहा कि दिल्ली सरकार का मंगलवार को बजट प्रस्तुत किया जाएगा। बजट प्रस्तुत करने से एक दिन पहले सदन में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार सदन में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। उधर, रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार जल्दबाजी में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत नहीं करेगी, बल्कि सभी विभागों की ऑडिट रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इसे सदन में रखा जाएगा। इस बीच भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने आप विधायकों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि चार बार पहले भी आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए बिना बजट पेश किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह कोई गैरकानूनी कार्य नहीं है और सरकार पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। वहीं आदमी पार्टी (आप) ने इस फैसले का विरोध किया। आप विधायकों ने कहा कि बिना आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए बजट को प्रस्तुत करना असंवैधानिक है। नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता से बचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि चाहे संसद हो या विधानसभा, बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाता है। वहीं आप विधायक संजीव झा ने सदन में कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण वित्तीय स्थिति को दर्शाता है और इस पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन सरकार इस मुद्दे से बच रही है। उसके बाद आप विधायकों ने सदन से वाकआउट किया।
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