हाई डोज रेडिएशन की मदद से ब्रेन ट्यूमर का इलाज महज 30 मिनट में होगा। अभी तक ऐसी सर्जरी के लिए मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता था। साथ ही दूसरे अन्य खर्च होते थे। इस तकनीक में मरीज महज 30 मिनट में सर्जरी करवाकर वापस घर जा सकता है। साथ ही पहले की तरह सामान्य काम कर सकता है।
डॉक्टरों का दावा है कि दक्षिणी दिल्ली के निजी अस्पताल में शुरू हुई यह सुविधा भारत की पहली नई तकनीक है। यह तकनीक केवल ब्रेन ट्यूमर पर कारगर है। गले से नीचे के हिस्से में होने वाले किसी भी ट्यूमर पर इससे इलाज नहीं हो सकता।
अपोलो अस्पताल समूह के संस्थापक चेयरमैन डा. प्रताप चंद्र रेड्डी ने कहा कि जाइरोस्कोपिक रेडियो सर्जरी मशीन से ब्रेन ट्यूमर का इलाज होगा। इसकी मदद से बिना चीरा लगाए व बिना बेहोश किए 30 मिनट में हाई डोज रेडिएशन की मदद से ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी की जा सकेगी। दर्द रहित सर्जरी के बाद उसी दिन मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। पहले दिन 65 वर्षीय बुजुर्ग की इससे सर्जरी की गई। डाक्टरों का दावा है कि इसकी मदद से ट्यूमर के पूरे हिस्से को नष्ट कर दिया गया। वैसे रेडियो सर्जरी के लिए गामा नाइफ व साइबर नाइफ कई अस्पतालों में पहले से इस्तेमाल हो रही हैं।
3.50 सेमी तक के ट्यूमर को किया जा सकता है नष्ट
अस्पताल के न्यूरो सर्जन डा. सुधीर त्यागी का कहना है कि इस तकनीक की मदद से 3.50 सेंटीमीटर तक के ट्यूमर को नष्ट किया जा सकता है। इससे दूसरे हिस्से को नुकसान नहीं होगा। यह शुरुआती स्टेज के ब्रेन कैंसर, बिनाइन ट्यूमर के इलाज में यह ज्यादा असरदार है। इस लगाने के लिए बड़े बंकर की जरूरत नहीं होती। इसमें रेडिएशन के लिए लीनियर एक्सीलेटर तकनीक इस्तेमाल होती है। इससे बिनाइन ट्यूमर, मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर (शरीर के अन्य हिस्सों से मस्तिष्क में पहुंचा ट्यूमर), मस्तिष्क में नसों के गुच्छे बनने व चेहरे के दर्द का इलाज किया जा सकता है।