मोदी अंकल, मैं वरूण हूं दिल्ली में ही रहता हूं। मिर्जा गालिब की गलियों में पैदा हुआ हूं। उनके बारे में हमेशा अपने पड़ोस के दादाजी से कहानियां सुनता रहता हूं। पर, मैं कई दिन से बीमार हूं।
पेट का दर्द मेरे पूरे बदन को निचोड़ कर रख देता है। पापा के पास इलाज का पैसा नहीं है। अंकल, क्या मैं मर जाऊंगा? अस्पताल के बेड पर लेटे-लेटे मुझे चींटियां सी काटने लगी हैं। दर्द होता है तो मम्मी से छिपकर तकिए में मुंह देकर रोने लगता हूं।
क्या करूं अंकल, मम्मी पापा मुझे देखकर रोने लगते हैं। काश मैं बीमार न होता तो कम से कम अपनी मम्मी की आंखों में आंसू तो नहीं आने देता...प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपना दर्द साझा करतीं ये लाइनें एक चिट्ठी में लिखी गई हैं, जिसे दिल्ली के 13 वर्षीय वरूण ने सर गंगाराम अस्पताल से लिखी है।