अमित को लगता था कि नीरज के कहने से उसे नौकरी से निकाला गया है। अमित ने नीरज को करीब एक लाख रुपये का फायदा पहुंचाया था। इसके बाद अमित नीमराणा, राजस्थान स्थित अपने गांव चला गया था। अमित ने लाडो सराय में किसी से 10 हजार रुपये ले रखे थे। वह व्यक्ति अमित के माता-पिता को पैसे देने के लिए फोन करते थे। अमित को लगता था कि नीरज ही फोन करवाकर उसकी बेइज्जती करा रहा है। इस पर उसने नीरज की हत्या करने की ठान ली। साजिश में अमित ने दक्षिणपुरी निवासी इशांत मेहरा को भी शामिल किया।
अमित और इशांत ने खानपुर में किराए पर कमरा लिया और 26 जून को वहां नीरज को शराब पिलाने के लिए बुलाया। तीनों ने शराब पी। वहां रात को नीरज ने हंगामा कर दिया तो पड़ोसी इकट्ठा हो गए। आरोपियों ने नीरज को 27 जुलाई की दोपहर को बुलाया और साथ में स्कूटी लाने को कहा।
इसके बाद तीनों लोग गोविंदपुरी से शराब खरीदकर सूरजकुंड और फिर गुरुग्राम चले गए। गुरुग्राम में फिर शराब खरीदी और मानेसर की पहाड़ियों पर चले गए। देर रात तक ये शराब पीते रहे। जब नीरज को ज्यादा नशा चढ़ गया तो दोनों ने पत्थरों से उसका सिर कुचल दिया और वहां से भाग कर वापस आ गए।
आरोपी अगले दिन घटनास्थल पर फिर गए और पेट्रोल डालकर नीरज को जला दिया। इन लोगों ने नीरज की स्कूटी को मुनिरका में लावारिस छोड़ दिया था। नीरज के मोबाइल को तोड़कर फेंक दिया था। पुलिस ने अमित की निशानदेही पर इशांत को गिरफ्तार कर लिया।