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Delhi Bomb Blast: आमिर और जसीर की स्पेशल NIA कोर्ट में पेशी, अब 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

Wed, 10 Dec 2025 05:34 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

दिल्ली में हुए कार बम धमाका मामले में बुधवार को स्पेशल एनआईए कोर्ट में आरोपी आमिर राशिद अली और जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश की पेशी हुई। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 
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दिल्ली कार धमाका (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली के लाल किला के पास हुए कार बम विस्फोट के मामले में स्पेशल एनआईए कोर्ट ने दो मुख्य आरोपियों को अब 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आमिर राशिद अली और जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को एनआईए की कस्टडी अवधि समाप्त होने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां जज ने यह फैसला सुनाया।

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एक और आरोपी नसीर मल्ला को सात दिन का एनआईए रिमांड
दिल्ली धमाका मामले में एनआईए ने नसीर मल्ला को गिरफ्तार किया। आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में मंगलवार को पेश किया गया, जहां से उसे सात दिन की रिमांड पर भेजा गया।  आरोपी नसीर मल्ला को गिरफ्तार करने के बाद दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद आरोपी को सात दिनों की एनआईए रिमांड में भेजा गया। अब सात दिनों तक जांच एजेंसी एनआईए मुख्यालय में आरोपी से पूछताछ होगी। आरोपी नासिर मल्ला से जुड़े कई अन्य आरोपियों के बारे में पूछताछ हो सकती है।

दिल्ली धमाके को हुआ एक महीना
राजधानी में 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए बम ब्लास्ट को एक महीना हो गया, लेकिन इस आतंकी साजिश के मुख्य मुकदमे की शुरुआत अब तक अदालत में नहीं हो सकी है। धमाके में 15 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे । शुरुआत में मामले की जांच दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के पास थी, लेकिन 18 नवंबर को गृह मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी।

अब तक सात को एनआईए ने पकड़ा
एनआईए ने अब तक सात प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें कथित मास्टरमाइंड और विस्फोटक जुटाने वाले लोग शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल एनआईए की हिरासत में हैं। हालांकि, पटियाला हाउस कोर्ट में अब तक केवल रिमांड बढ़ाने और आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर ही सुनवाई हो रही है। मुख्य मामले का आरोपपत्र चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय लिंक और तकनीकी साक्ष्यों की वजह से जांच में अतिरिक्त समय लग रहा है।
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पीड़ित परिवार में बढ़ रहा असंतोष
वकीलों ने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने में अभी समय लगेगा, इससे पीड़ित परिवारों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। कानून कहता है कि चार्जशीट दाखिल करने की 90 दिन की समय-सीमा आमतौर पर पूरी की जाती है, इसलिए अभी कम से कम दो महीने और लग सकते हैं। इस देरी से मृतकों के परिजनों में निराशा है। 

पीड़ित परिवार के सदस्यों ने कहा कि हमारे बच्चे की लाश भी ठीक से नहीं मिली थी। एक महीना बीत गया, लेकिन न्याय की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। आरोपी जेल में आराम से हैं, जबकि हम सड़कों पर भटक रहे हैं। एनआईए के अनुसार, यह एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की साजिश थी, जिसमें कश्मीर और फरीदाबाद के डॉक्टरों व धार्मिक व्यक्तियों का नेटवर्क शामिल था। ब्लास्ट में इस्तेमाल वाहन (हुंडई आई20) को अमोनियम नाइट्रेट से लादा गया था और पुलवामा निवासी मुख्य संदिग्ध डॉ. उमर उन-नबी खुद को उड़ा लेने वाला आत्मघाती हमलावर था। जांच में विदेशी हैंडलर्स के लिंक भी सामने आए हैं।

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