अधिकारियों के अनुसार, व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का कश्मीर से लेकर हरियाणा समेत कई राज्यों में नेटवर्क फैला हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद का व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल हमास की रणनीति अपना रहा है। जानकारों के अनुसार, हथियारों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल और अस्पतालों को आर्म्स स्टोरेज के रूप में उपयोग करना हमास के मैनुअल से मेल खाता है। एजेंसियों की मानें तो हमास की रणनीति का इस्तेमाल करने वाला जैश का सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल कोई संयोग नहीं है। ड्रोन को हथियार बनाने से लेकर अस्पतालों में हथियार रखने तक सब कुछ हमास की पुस्तिका से लिया गया लगता है।
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इसी साल की शुरुआत में 5 फरवरी को फलस्तीनी संगठन हमास ने पहली बार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में जैश और लश्कर के आतंकवादियों के साथ मंच साझा किया था। हमास नेता डॉ. खालिद कद्दौमी, डॉ. नाजी जहीर वहां मौजूद अन्य लोगों में प्रमुख थे। यह बैठक इस बात का संकेत थी कि आतंकी नेटवर्क अब वैश्विक स्तर पर तालमेल बढ़ा रहे हैं।
फरवरी में रची गई थी साजिश
जांच एजेंसियों का कहना है कि इस साजिश की स्क्रिप्ट फरवरी में लिखी गई थी और अब इसका नेटवर्क बेनकाब हो रहा है। जैश का मॉड्यूल न केवल ड्रोन को हथियार बनाने की योजना पर काम कर रहा था, बल्कि अस्पतालों को हथियारों के भंडारण के लिए इस्तेमाल करने की रणनीति भी हमास की तर्ज पर अपनाई गई थी।