एनआईए और दिल्ली पुलिस की संयुक्त जांच में सामने आया है कि धमाके से ठीक पहले मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर मोहम्मद नबी ने हरियाणा के नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका शहर में स्थित एक एटीएम से पैसे निकालने का प्रयास किया था। हालांकि एटीएम मशीन बंद होने के बावजूद उमर ने गार्ड को रिश्वत देकर मशीन खुलवाने की कोशिश की, लेकिन पैसे नहीं निकल सके।
इसके बाद वह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली की ओर रवाना हो गया। जाननकारी के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और टावर लोकेशन डेटा से यह पुष्टि हुई है कि उमर 10 नवंबर की दोपहर फरीदाबाद से फरार होने के बाद मेवात (नूंह) क्षेत्र पहुंचा। फिरोजपुर झिरका के एक व्यस्त बाजार स्थित एटीएम पर वह बिना मास्क के नजर आया।
फुटेज में दिखा कि उमर नर्वस लग रहा था और एटीएम गार्ड से बहस करता हुआ दिखा। गार्ड ने बताया कि उमर ने रिश्वत का लालच दिया ताकि मशीन को मैन्युअली चालू किया जाए। लेकिन तकनीकी खराबी के कारण ट्रांजेक्शन फेल हो गया। उमर ने गार्ड को धमकाया भी, लेकिन बिना पैसे लिए ही वहां से खाली हाथ चला गया।
मेवात से दो और एमबीबीएस डॉक्टर समेत तीन हिरासत में
लाल किला धमाके के बाद नूंह जिला जांच एजेंसियों के निशाने पर है। एक सप्ताह में यहां से पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है जिनमें तीन एमबीबीएस डॉक्टर, एक खाद विक्रेता और एक इमाम शामिल बताया जा रहा है। लगातार हो रही कार्रवाई से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में गुरुवार देर रात केंद्रीय जांच एजेंसियों ने दो और डॉक्टरों को हिरासत मे लिया। हिरासत में लिए गए युवकों की पहचान सुनहेड़ा निवासी डॉ. मुस्तकीम और अहमदबास निवासी डॉ. मोहम्मद के रूप में हुई है। दोनों की पढ़ाई अल-फलाह यूनिवर्सिटी (फरीदाबाद) से चल रही थी।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. मुस्तकीम ने चीन से एमबीबीएस किया था और 2 नवंबर को अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अपनी इंटर्नशिप पूरी की थी। डॉ. मोहम्मद भी वहीं से एमबीबीएस कर इंटर्नशिप कर रहे थे। बताया जा रहा है कि दोनों की पहचान और नजदीकी संबंध संदिग्ध आतंकी उमर से थे।
उमर की कार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी, जिसका वीडियो वायरल है। इससे पहले भी नूंह से एक डॉक्टर और एक खाद विक्रेता को हिरासत में लिया गया था। खाद विक्रेता पर अमोनियम नाइट्रेट बेचने का शक जताया गया है। नूंह शहर से कुछ दिन पहले डॉ. रिहान को भी उठाया गया था, जो तावडू के एक निजी अस्पताल में काम करते थे और अल-फलाह से ही पढ़े थे।