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Delhi BJP State Executive Meeting: 'रबर स्टांप' बनकर रह जाएंगे केजरीवाल, CM को घेरने की रणनीति बनाएगी भाजपा

सार

Delhi BJP State Executive Meeting: भाजपा के नियमों के अनुसार पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के 15 दिन के अंदर सभी प्रदेशों की कार्यकारिणी की बैठक हो जानी चाहिए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 16-17 जनवरी को दिल्ली में हो चुकी है। अब इसके बाद प्रदेशों की कार्यकारिणी आयोजित की जाएगी...
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Delhi BJP State Executive Meeting - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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Delhi BJP State Executive Meeting: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल वीके सक्सेना के बीच अधिकारों को लेकर रस्साकशी जारी है। विधानसभा में अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह उपराज्यपाल पर हमला किया, उससे इस मामले में विवाद और बढ़ गया है। भाजपा इस समस्या का स्थाई समाधान खोजने की राह पर आगे बढ़ रही है। 27-28 जनवरी को दिल्ली भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होगी। इस बैठक में इस समस्या पर गहराई से विचार किया जाएगा और इसका समाधान पाने की कोशिश की जाएगी। यदि भाजपा की चली तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजधानी में एक रबर 'स्टांप बनकर' रह जाएंगे।

दरअसल, भाजपा के नियमों के अनुसार पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के 15 दिन के अंदर सभी प्रदेशों की कार्यकारिणी की बैठक हो जानी चाहिए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 16-17 जनवरी को दिल्ली में हो चुकी है। अब इसके बाद प्रदेशों की कार्यकारिणी आयोजित की जाएगी। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में तय किए गए मुद्दों को प्रदेश के स्तर पर आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई जाती है। बैठक में पिछली कार्यकारिणी में तय किए गए मुद्दों को कितना लागू किया जा सका, इस पर विचार भी किया जाता है।

इसी नियम के आधार पर दिल्ली प्रदेश में 27-28 जनवरी को दो दिनों की प्रदेश कार्यकारिणी का आयोजन किया जाएगा। 27 जनवरी को पार्टी के पंत मार्ग स्थित प्रदेश कार्यालय पर शीर्ष पदाधिकारियों की बैठक होगी। बैठक के दूसरे दिन (28 जनवरी को) अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में शीर्ष नेताओं का जमावड़ा होगा। इसमें प्रदेश के पदाधिकारियों के अलावा दिल्ली प्रभारी बैजयंत पांडा, सहप्रभारी अलका गुर्जर और दिल्ली से आने वाले राष्ट्रीय पदाधिकारी भी भाग लेंगे।

ये होंगे मुद्दे

दिल्ली भाजपा के एक शीर्ष नेता के मुताबिक, पार्टी इस बैठक में राजनीतिक, पर्यावरण और आर्थिक प्रस्ताव पास कर सकती है। लेकिन पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व भी यह मान रहा है कि अरविंद केजरीवाल के कारण दिल्ली के विकास में बाधा आ रही है। लिहाजा ऐसा रास्ता निकाला जा सकता है, जिससे वे दिल्ली के विकास कार्य प्रभावित न कर सकें। नेता ने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने अब तक दिल्ली में आयुष्मान योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू नहीं होने दिया गया है, जबकि पूरे देश में इस योजना से लाखों घर बनाकर गरीबों को सौंपे जा चुके हैं।

दिल्ली की राजनीति के जानकार मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब उनकी काट खोजने के लिए मन बना चुका है। बहुत संभव है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री की संवैधानिक स्थिति को बरकरार रखते हुए उनके अधिकारों को इस तरह से सीमित कर दिया जाए जिससे वे सामान्य कामकाज करते हुए भी दिल्ली के विकास कार्यों को प्रभावित न कर सकें।

दो दिन पहले राष्ट्रपति के द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों की शक्तियां बढ़ाकर (औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थित संहिता 2020 का अधिकार देकर) इसी दिशा में एक कोशिश की जा चुकी है। अब इससे आगे की राह तलाश कर उनको रबर स्टांप बना दिया जा सकता है। इससे केजरीवाल केंद्र सरकार के कार्यों को दिल्ली प्रदेश में लागू करने से नहीं रोक सकेंगे।  

37 फीसदी अल्पसंख्यकों को मिले आवास

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने अमर उजाला को बताया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाखों मकान बनाकर गरीबों को सौंपे हैं। इनमें से 37 फीसदी मकान अल्पसंख्यक मुसलमानों को मिले हैं। यदि दिल्ली में भी प्रधानमंत्री आवास योजना लागू करने दिया गया होता, तो इससे दिल्ली के गरीबों को लाभ होता, लेकिन दिल्ली सरकार के रोड़ा अटकाने के कारण केंद्र सरकार दिल्ली के गरीबों को पर्याप्त लाभ नहीं पहुंचा पाई। उन्होंने कहा कि भाजपा ने डीडीए के माद्यम से 3026 मकान दिल्ली के गरीब नागरिकों को सौपे हैं। लेकिन सरकार इससे आगे बढ़कर बड़ी संख्या में लोगों को आवास की सुविधा प्रदान करना चाहती है। इसकी कोशिशें की जाएंगीं।

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