शीला दीक्षित का भारतीय राजनीति में एक नाम है। जब प्रत्याशी के तौर पर उनका नाम घोषित हुआ तो एक बार तो उनको भी डर लगा। मैंने शीला दीक्षित या आप के दिलीप पांडेय को हराने के लिए नहीं बल्कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली की दुर्दशा को सुधारने के लिए चुनाव लड़ा और उनकी जीत का अंत भी बढ़ गया। - मनोज तिवारी, उत्तर पूर्व दिल्ली।
26 वर्ष की राजनीति में मेरा सातवां चुनाव था। मैं हर चुनाव में विजयी रहा। लेकिन पहली बार हुआ कि विपक्ष ने प्रचार का स्तर को इतना गिरा दिया। आप को अपना अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा। हम अब दिल्ली की रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान देंगे। - डा. हर्षवर्धन, चांदनी चौक ।
जिस दिन हम अपना जमीर हार जाएंगे उस दिन कुछ नहीं बचेगा। मुझ पर घिनौने आरोप लगाए गए। मेरी भी बेटियां हैं, मैं किसी महिला के प्रति ऐसे घिनौने आरोप के बारे में सोच भी नहीं सकता। संसद की एक सीट जीतने के लिए अपना जमीर बेच कर आरोप लगाने वाले शीशे के सामने अपना चेहरा कैसे देखते होंगे। - गौतम गंभीर, पूर्वी दिल्ली।
दिल्ली मिनी भारत है, देश ने मूड बना लिया था कि मोदी को पुन: प्रधानमंत्री बनाना है तो दिल्ली की जनता कैसे पीछे रह जाती। हमने राष्ट्रवाद, भ्रष्टाचार खत्म करने के मुद्दे पर लड़े और जीत हासिल की। केजरीवाल ने न तो कोई काम किया न ही दिल्ली का विकास किया। राहुल गांधी जितने देशों के नाम भी नहीं जानते उतने देशों में मोदी को अवार्ड मिल चुके है। - प्रवेश वर्मा, पश्चिमी दिल्ली ।
मैं स्वयं को सबसे कमजोर मानता था। जब भी दिल्ली में एक सीट फंसी होने की सूचना आती थी तो मैं समझता था कि यह सीट उनकी होगी। अब सातों सीटें कमल के रूप में खिल चुकी हैं। सात सुरों के सात सांसद मिल चुके हैं। अब सभी को मिल कर दिल्ली के विकास के लिए काम करना है। - हंसराज हंस, उत्तर पश्चिमी दिल्ली।