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दिल्ली में सरकार बनाने पर बोले राजनाथ

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दिल्ली सरकार को लेकर उपराज्यपाल की ओर से राष्ट्रपति को भेजी गई चिट्ठी गृहमंत्रालय को भेज दी गई है। हालांकि गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि दिल्ली में सरकार को लेकर अंतिम फैसला पार्टी का होगा।
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उधर, दिल्ली में सरकार गठन के मुद्दे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को बैठक करेंगे। इसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हो सकते हैं। गृहमंत्री के बयान के बाद इस बैठक का महत्व और बढ़ गया है।

सूत्रों के मुताबिक मंगलवार तक दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर भाजपा अंतिम फैसला कर सकती है। नितिन गडकरी ने सतीश से मुलाकात के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकत की है।
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और भी... http://aajtak.intoday.in/story/breaking-news-1-59000.htmlपूर्व भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर मंथन किया।

रास्ता साफ, दिल्ली में बनेगी भाजपा सरकार

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने की सिफारिश की है। अंग्रेजी दैनिक द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक उपराज्यपाल ने भाजपा को दिल्ली का सबसे बड़ा दल बताते हुए उसे सरकार बनाने का मौका देने की बात कही है।

अखबार के मुताबिक एलजी की ओर से प्रणब मुखर्जी को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि भाजपा को विधानसभा में अपना बहुंमत साबित करने का मौका मिलना चाहिए। यही नहीं एलजी से ‌चिट्ठी मिलने के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केंद्र सरकार से उसका पक्ष पूछ लिया है।

वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का कहना है कि‌ अगर पार्टी को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण मिलता है तो वह सरकार बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। हालांकि उनके मुताबिक अभी इस बारे में उनसे एलजी ने या फिर किसी कोई संपर्क नहीं किया है।

तीन विधायकों पर अटकी बात

एलजी की ओर से दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर की गई पहल के बाद बात उन तीन विधायकों पर बात आकर अटक गई है, जिन्होंने लोकसभा चुनावों जीत दर्ज की थी। दरअसल, भाजपा के पास दिल्ली की कुल 32 सीटे हैं। और सरकार बनाने के लिए कुल 35 सीटों की आवश्यकता होती है, लेकिन अहम बात यह है कि भाजपा के तीन विधायक अब सांसद हो गए हैं।

इसीलिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बार-बार पार्टी के पास 29 विधायक होने की बात कर रहे हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि उन तीन विधायक हर्षवर्धन, रमेश विधूड़ी और परवेश वर्मा विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है अथवा नहीं। लेकिन तीनों ही सांसद केंद्र सरकार में अहम भूमिका निभा रहे हैं, ऐसे में उनके वापसी की उम्मीद न के बराबर है।

उधर, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के उपराज्यपाल पर हमला बोलते हुए इस कदम को असंवैधानिक करार दिया है्। आप नेता आशुतोष कहा है कि दिल्ली में भाजपा को सरकार बनाने का मौका बिल्कुल नहीं मिलना चाहिए। आशुतोष के मुताबिक एलजी भाजपा को मौका देकर अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं।
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एक ‌बाहरी विधायक समर्थन देने को तैयार

दिल्ली में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल के पास 35 विधायकों का बहुमत होना चाहिए। दिल्ली में भाजपा के पास कुल 32 विधायक हैं, लेकिन उनमें तीन सांसद हो चुके हैं। अब भाजपा और उनके सहयोगी अकाली दल को मिलाकर पार्टी के पास 29 विधायक हैं।

इस लिहाज से भाजपा दिल्ली में सबसे बड़ी पार्टी है। आपको बताते चलें कि हालांकि आम आदमी पार्टी ने भी चुनावों में 28 सीट हासिल की थी, लेकिन बाद में अनबन के चलते विधायक विनोद कुमार बिन्नी को पार्टी से निकाल दिया गया था। ऐसे में आप के पास अब केवल 27 विधायक ही हैं।

एलजी ने भी भाजपा को सबसे बड़ा दल मानते हुए उसे सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की है। उधर, निर्दलीय विधायक रामबीर शौकीन ने भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि दिल्ली के विधायक और दिल्ली की जनता चुनाव नहीं चाहती है। ऐसी स्थिति में भाजपा को समर्थन देना ही बेहतर विकल्प है।
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