गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों की शहादत को स्कूलों के मंच पर दिखाने पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी से लेकर निजी स्कूल प्रमुखों को पत्र लिखा है।
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गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों और उनके परिवार के सदस्यों पर आधारित नाटक मंचन को लेकर मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है। दरअसल, निदेशालय को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से पत्र प्राप्त हुआ है। इसके बाद निदेशालय ने स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आयोग के पत्र के अनुसार कोई भी व्यक्ति या संगठन साहिबजादों और उनके परिवार के सदस्यों के ऐतिहासिक व्यक्तित्व को नाटकों, ड्रामा या प्रदर्शनों में गलत तरीके से प्रस्तुत न करे। पत्र के अनुसार सिख गुरुओं एवं उनके परिवार के सदस्यों की भूमिका निभाना प्रतिबंधित है। इसे अपमानजनक माना जाता है।
कोई भी व्यक्ति स्वयं को किसी भी सिख गुरु या उनके परिवार के सदस्य के रूप में अभिनय व प्रदर्शन नहीं कर सकता है। साहिबजादों और उनके परिवार के सदस्यों को किसी भी मंचीय नाटक या ड्रामा में व्यक्तियों द्वारा चित्रित नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों को साहिबजादों की तरह कपड़े पहनने या उनकी नकल करने की अनुमति नहीं है। यह सिख सिद्धांतों और प्रथाओं के खिलाफ है।
सिख गुरुओं और उनके परिवार के सदस्यों के प्रति श्रद्धा केवल लिखित या मौखिक रूप में ही बताई जा सकती है। सिख गुरुओं और उनके परिवार के सदस्यों का इतिहास एनिमेशन के माध्यम से दिखाया जा सकता है। ऐतिहासिक शख्सियत खासकर गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों का चित्रण बहुत ही सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व का मुद्दा है।